अधिशोषण क्या है प्रकार तथा उपयोग लिखिए, विधि, अवशोषण में अंतर, उपयोगिता

अधिशोषण

जब किसी ठोस पदार्थ को द्रव या गैस के संपर्क में रखा जाता है तो ठोस की सतह पर द्रव या गैस स्थाई रूप से एकत्रित हो जाती है इस प्रक्रिया को अधिशोषण (adsorption in Hindi) कहते हैं।
अधिशोषण की घटना में ठोस पदार्थ की सतह पर द्रव या गैस की सांद्रता बढ़ जाती है अधिशोषण एक ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया है।
अधिशोषण प्रक्रिया जिस पृष्ठ पर होती है उसे अधिशोषक कहते हैं। एवं जिस ठोस पदार्थ पर अधिशोषण होता है उससे अधिशोष्य कहते हैं।

अधिशोषण के उदाहरण

  1. NH3 का चारकोल द्वारा अधिशोषण
  2. अभ्रक धातु द्वारा नाइट्रोजन का अधिशोषण
  3. सिलिका जेल द्वारा जल का अधिशोषण
  4. चारकोल द्वारा ब्रोमीन का अधिशोषण

अधिशोषण के प्रकार

अधिशोषण दो प्रकार के होते हैं।
(1) भौतिक अधिशोषण
(2) रासायनिक अधिशोषण
भौतिक और रासायनिक अधिशोषण पर हमनें एक अलग से लेख तैयार किया है जिसका लिंक दिया गया है।
पढ़ें.. भौतिक तथा रासायनिक अधिशोषण क्या है

अधिशोषण को प्रभावित करने वाले कारक

1. ताप का प्रभाव –
ताप बढ़ाने पर भौतिक अधिशोषण का मान घटता है चूंकि अधिशोषण एक ऊष्माक्षेपी प्रक्रम है तथा रासायनिक अधिशोषण का मान प्रारंभ में बढ़ता है फिर बाद में घटता है।

2. दाब का प्रभाव –
दाब के बढ़ाने पर अधिशोषण की क्रिया में वृद्धि होती है।

3. पृष्ठ क्षेत्रफल का प्रभाव –
अधिशोषण, पृष्ठीय क्षेत्रफल पर निर्भर करता है एवं पृष्ठीय क्षेत्रफल बढ़ाने पर अधिशोषण का मान बढ़ता है।

अधिशोषण के उपयोग

  • कार्बनिक यौगिकों के शोधन में
  • उत्प्रेरक सिद्धांत की व्याख्या में
  • गैस मास्क में
  • जल के शोधन में
  • अक्रिय गैसों को अलग करने में आदि

अवशोषण

यह एक स्थूल प्रक्रिया है इसमें अधिशोषण एक समान दर से होता है अवशोषण में कोई सार्थक ऊष्मा परिवर्तन नहीं होता है।

अवशोषण के उदाहरण

  • स्टार्च द्वारा आयोडीन का अवशोषण
  • CaCl2 द्वारा जल का अवशोषण
  • किशमिश द्वारा जल का अवशोषण
  • CaCl2 में NH3 का अवशोषण

अधिशोषण तथा अवशोषण में अंतर

  1. अधिशोषण एक पृष्ठीय घटना है इसमें अधिशोष्य अणु अधिशोषक की सतह पर एकत्रित रहते हैं। जबकि अवशोषण एक स्थूल प्रक्रिया है।
  2. अधिशोषण एक ऊष्माक्षेपी प्रक्रिया है जबकि अवशोषण में कोई सार्थक ऊष्मा परिवर्तन नहीं होता है।
  3. अधिशोषण की दर प्रारंभ में अधिक तथा बाद में घटती है। जबकि अवशोषण की दर एकसमान रहती है।
  4. चारकोल द्वारा ब्रोमीन का अधिशोषण होता है जबकि स्टार्च द्वारा आयोडीन का अवशोषण होता है।

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