प्रत्यावर्ती धारा तथा वोल्टता संबंधी परिभाषाएं | आयाम, आवर्तकाल, आवृत्ति तथा कलान्तर

प्रत्यावर्ती धारा से संबंधित सभी टाॅपिको पर एक सुंदरता पूर्वक अध्याय बनाया गया है। इस पाठ्यक्रम के अंतर्गत प्रत्यावर्ती धारा तथा वोल्टता से संबंधित सभी परिभाषाओं को रखा गया है। जैसे प्रत्यावर्ती धारा का आयाम, प्रत्यावर्ती धारा का आवर्तकाल, प्रत्यावर्ती धारा की आवृत्ति, प्रत्यावर्ती धारा की कला, प्रत्यावर्ती धारा का तात्क्षणिक मान को आसान शब्दों में समझाया गया है।

प्रत्यावर्ती धारा का आयाम

जब कोई कुंडली चुंबकीय क्षेत्र में घूमती है तो दो स्थितियां ऐसी आती हैं। जिसमें परिपथ में उत्पन्न प्रत्यवर्ती वोल्टता तथा प्रत्यावर्ती धारा का मान महत्तम होता है। प्रत्यावर्ती धारा तथा वोल्टता के इस अधिकतम मान को प्रत्यावर्ती धारा का आयाम (amplitude of alternating current in Hindi) कहते हैं इसे प्रत्यावर्ती धारा का शिखर मान भी कहा जाता है।

प्रत्यावर्ती धारा की आवृत्ति

प्रतिवर्ती धारा प्रत्येक सेकंड में जितने चक्कर पूरा करती है उसे धारा की आवृत्ति कहते हैं।
अर्थात 1 सेकंड में प्रतिवर्ती धारा जितनी साइकिलें पूरी करती है उसे प्रतिवर्ती धारा की आवृत्ति कहते हैं। इसे f से प्रदर्शित करते हैं।
यदि प्रतिवर्ती धारा का आवर्तकाल T हो तो आवृत्ति
\footnotesize \boxed { f = \frac{1}{T} }

इसके अनुसार आवृत्ति की परिभाषा : आवर्तकाल के व्युत्क्रम को प्रत्यावर्ती धारा की आवृत्ति (frequency of alternating current in Hindi) कहते हैं।
जबकि T = 2π/ω होता है तो आवृत्ति
\footnotesize \boxed { f = \frac{ω}{2π} }
जहां ω को कोणीय वेग कहते हैं आवृत्ति का मात्रक चक्कर/सेकंड यह हर्ट्स होता है। जिसे Hz द्वारा प्रदर्शित किया जाता है।
भारत में घरों में प्रयोग की जाने वाली प्रत्यावर्ती धारा की आवृत्ति 50 हर्ट्स होती है।

प्रत्यावर्ती धारा का आवर्तकाल

प्रत्यावर्ती धारा को अपना एक चक्कर पूरा करने में इतना समय लगता है उसे प्रत्यावर्ती धारा का आवर्तकाल कहते हैं। (Periodic time of alternating current in Hindi) इसे T द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। तो
\footnotesize \boxed { T = \frac{2π}{ω} }
आवर्तकाल का मात्रक सेकंड होता है क्योंकि यह समय को ही दर्शाता है। जहां ω कोणीय वेग है।

प्रत्यावर्ती धारा का कालांतर

प्रत्यावर्ती धारा परिपथ में धारा तथा विभवांतर जब एक साथ अधिकतम और एक साथ न्यूनतम मान प्राप्त करते हैं तो इनके बीच कालांतर शून्य होता है।
इसके विपरीत जब धारा तथा विभवांतर अलग-अलग अधिकतम और न्यूनतम मान प्राप्त करते हैं तो प्रत्यावर्ती धारा परिपथ में कालांतर का कुछ मान होता है। अर्थात् धारा और विभवांतर के बीच का कालांतर पाया जाता है।

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प्रत्यावर्ती वोल्टेज

इस प्रकार का वोल्टेज जिसका मान व दिशा समय के साथ बदलता है और एक निश्चित समय के बाद उसी मान व दिशा में वापस लौट आता है। तो इस प्रकार के वोल्टेज को प्रत्यावर्ती वोल्टेज alternating voltage in Hindi कहते हैं।

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