कृत्रिम उपग्रह क्या है इसके उपयोग लिखिए, परिभाषा, किसे कहते हैं

कृत्रिम उपग्रह

पिछले अध्याय से हम पढ़ चुके हैं कि जब कोई पृथ्वी के परितः घूर्णन करता हुआ उपग्रह पृथ्वी तल के इतने समीप आ जाए, कि उसकी ऊंचाई को पृथ्वी की त्रिज्या की तुलना में नगण्य मान लें, तो उस उपग्रह को कक्षीय वेग 8 किमी/सेकंड होता है।
अब यदि हम किसी पिंड को आकाश में भेजकर उसे 8 किमी/सेकंड का वेग प्राप्त करा दें, तो वह पिंड पृथ्वी के चारों ओर एक निश्चित कक्षा में परिक्रमण करने लगता है। इस प्रकार के पिंड को कृत्रिम उपग्रह (artificial satellite in Hindi) कहते हैं।

भारत का अपना कृत्रिम उपग्रह आर्यभट्ट सन् 1975 ई० में आकाश में छोड़ा गया था।
विश्व का पहला कृत्रिम उपग्रह सन 1957 ई० में छोड़ा गया था।
आर्यभट्ट के पश्चात भारत ने अनेकों कृत्रिम उपग्रह को पृथ्वी के परितः परिक्रमण करने के लिए छोड़े गए। जैसे भास्कर प्रथम, भास्कर द्वितीय, रोहिणी प्रथम, रोहिणी द्वितीय तथा इनसेट- 1-A, 1-B, 1-C, 1-D आदि कृत्रिम उपग्रह पृथ्वी के परितः परिक्रमण करने के लिए छोड़े गए हैं।
अब तक पूरे विश्व के सभी देशों के सैकड़ों कृत्रिम उपग्रह पृथ्वी का परिक्रमा कर रहे हैं। वास्तव में कृत्रिम उपग्रह विज्ञान, इंजीनियरिंग तथा मौसम का पता लगाना और रक्षा संबंधित क्षेत्रों में इसका उपयोग किया जाता है।

कृत्रिम उपग्रह भी चंद्रमा की ही तरह पृथ्वी के चारों ओर गुरुत्वाकर्षण बल के अंतर्गत ही एक वृत्तीय पथ पर परिक्रमण करते रहते हैं। इन उपग्रहों पर एक बल कार्य करता है जो इसे पृथ्वी के केंद्र की ओर आकर्षित करता है यह अभिकेंद्र बल होता है।

कृत्रिम उपग्रह के उपयोग

  1. मौसम की सूचना में इसका प्रयोग किया जाता है।
  2. पृथ्वी के आकार के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने में।
  3. अंतरिक्ष उड़ान तथा दूसरे ग्रहों पर जाने के लिए इनका प्रयोग होता है।
  4. रक्षा के लिए कृत्रिम उपग्रह प्रयोग किए जाते हैं।
  5. युद्ध काल में दूसरे पर हमला करने में।
  6. टेलीविजन कार्यक्रमों तथा रेडियो संवादों को भेजने में।
  7. वायुमंडल के बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करने में।
  8. उल्का पिंडों का अध्ययन करने में तथा इनसे बचने में।
  9. आंधी, तूफान का पता लगाने में।

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कृत्रिम उपग्रह के प्रकार

कृत्रिम उपग्रह दो प्रकार के होते हैं।
(1) भूस्थिर उपग्रह
(2) ध्रुवीय उपग्रह
इन दोनों के बारे में आगे बताया गया है।
पढ़ें.. भू-तुल्यकाली और ध्रुवीय उपग्रह क्या है

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