उपग्रह की बंधन ऊर्जा क्या है, सूत्र | binding energy of a satellite in Hindi

उपग्रह की बंधन ऊर्जा

वह न्यूनतम उर्जा जो किसी पिंड अथवा उपग्रह को देने पर वह पिंड अपनी कक्षा छोड़कर पृथ्वी के गुरुत्वीय क्षेत्र को पार जाएं, अर्थात पलायन कर जाए। तो उस ऊर्जा को उपग्रह की बंधन ऊर्जा (binding energy of a satellite in Hindi) कहते हैं।
\footnotesize \boxed { उपग्रह\,की\,बंधन\,ऊर्जा = \frac{1}{2} \frac{GM_em}{R_e} }

उपग्रह की संपूर्ण ऊर्जा

पृथ्वी के परितः परिक्रमण करते किसी उपग्रह में गतिज और स्थितिज दोनों ऊर्जाएं विद्यमान होती हैं। अर्थात
पृथ्वी के गुरुत्वीय क्षेत्र के कारण उपग्रह के पास स्थितिज ऊर्जा होती है। जबकि उपग्रह को गतिमान रहने के लिए गतिज ऊर्जा होती है। इन दोनों के योग को उपग्रह की संपूर्ण ऊर्जा कहते हैं।

नाना उपग्रह का द्रव्यमान m है तो उसकी स्थितिज ऊर्जा
U = -\frac{GM_em}{R_e}     समी.①
यदि उपग्रह की कक्षीय वेग vo है तो उसकी गतिज ऊर्जा K = \frac{1}{2} mvo2
चूंकि उपग्रह को अभिकेंद्र बल, गुरुत्वाकर्षण बल से ही प्राप्त होता है अर्थात्
अभिकेंद्र बल = गुरुत्वाकर्षण बल
\frac{mv_o^2}{R_e} = \frac{GM_em}{R_e^2}
mvo2 = \frac{GM_em}{R_e}
चूंकि latex] \frac{1}{2} [/latex]mvo2 उपग्रह की गतिज ऊर्जा है तो
2K = \frac{GM_em}{R_e}
K = \frac{1}{2} \frac{GM_em}{R_e}     समी.②
अतः उपग्रह की संपूर्ण ऊर्जा
E = K + U
समी.① व समी.② से K और U के मान रखने पर
E = \frac{1}{2} \frac{GM_em}{R_e} + -\frac{GM_em}{R_e}
\footnotesize \boxed { E = - \frac{1}{2} \frac{GM_em}{R_e} }

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यह उपग्रह की कुल ऊर्जा का सूत्र है।
उपग्रह की कुल ऊर्जा ऋणात्मक प्राप्त होती है इसका अर्थ होता है कि उपग्रह को अनंत (पलायन कर जाने) पर भेजने के लिए या कुल ऊर्जा को शून्य करने के लिए उपग्रह को इतनी ऊर्जा देनी होगी तब वह उपग्रह अपनी कक्षा छोड़ देगा। अर्थात् पलायन कर जाएगा।

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