वात्या भट्टी क्या है, आयरन के निष्कर्षण में प्रयुक्त, लोहा गलाने की भट्टी, चित्र

प्रगलन

अयस्क में कोक तथा उचित गालक मिलाकर, मिश्रण को उच्च ताप पर गलाने की प्रक्रिया को प्रगलन कहते हैं।
प्रगलन की प्रक्रिया वात्या भट्टी में होती है।

वात्या भट्टी

वात्या भट्टी छोटी एवं बड़ी दोनों प्रकार की होती है बड़ी वात्या भट्टी आकार में चिमनी की तरह होती है जो 25 से 60 मीटर ऊंचाई तक एवं 12 से 14 मीटर व्यास की होती है। इसकी बाहरी सतह इस्पात की चादरों से बनी होती हैं एवं इसकी अंदर की सतह अग्निसह ईंटों की बनी होती है।
इस भट्टी के तीन भाग होते हैं।

1. ऊपरी भाग
इस भाग को हाॅपर कहते हैं भट्टी के अंदर अयस्क, कोक कथा गालक के मिश्रण को इसी भाग में डाला जाता है। इस भाग में कप तथा शंकु व्यवस्था होती है जिसकी सहायता से अयस्क धीरे-धीरे भट्टी में जाता है।

2. मध्य भाग
इसमें दो पाइप लगे होती है जिनकी सहायता से भट्टी में गर्म गैस प्रवाहित की जाती है जिन्हें ट्वीयर कहते हैं। इस भाग में एक द्वार बना होता है जहां से भट्टी में व्यर्थ गैसों को बाहर निकाला जाता है।

3. निचला भाग
भट्टी के सबसे निचले भाग को तल कहते हैं। जिसमें पिघली हुई धातु द्रव के रूप में एकत्रित होती है इस भाग में दो मार्ग होते हैं एक मार्ग से गलित धातु बाहर निकलती है तथा दूसरे मार्ग से धातुमल बाहर निकलती है चित्र से स्पष्ट है।

वात्या भट्टी
वात्या भट्टी

वात्या भट्टी का मुख्य उपयोग आयरन के निष्कर्षण में किया जाता है। छोटी वात्या भट्टी में कॉपर तथा लेड का निष्कर्षण भी किया जाता है। चित्र के अनुसार आप वात्या भट्टी की क्रियाविधि आसानी से समझ गए होंगे।

वात्या भट्टी की अभिक्रियाएं

500 – 800K पर –
Fe2O3 पहले Fe3O4 में अपचयित होता है तथा बाद में FeO में हो जाता है।
3Fe2O3 + CO \longrightarrow 2Fe3O4 + CO2
Fe3O4 + 4CO \longrightarrow 3Fe + 4CO2
Fe2O3 + CO \longrightarrow 2FeO + CO2
वात्या भट्टी का यह निम्न का परिसर होता है।
800 – 1000°C पर –
CaCO3 \xrightarrow{800°C} CaO + CO2
CaO + SiO2 \xrightarrow{1000°C} \footnotesize \begin{array}{rcl} CaSiO_3 \\ धातुमल \end{array}
1200 – 1300°C पर –
2CO \longrightarrow CO2 + C
यह वात्या भट्टी की गलन खंड परिसर होती है।

लोहे के निष्कर्षण को अलग अध्याय में समझाया गया है वात्या भट्टी से संबंधित ज्यादातर चित्र बनाने के ही प्रश्न आते हैं और बाकी कुछ नहीं आता है वात्या भट्टी से आयरन का निष्कर्षण महत्वपूर्ण है जो परीक्षाओं में भी कभी-कभी पूछ लिया जाता है।
पढ़ें… लोहे का निष्कर्षण कैसे होता है, उपयोग लौह अयस्क क्या है, आयरन


शेयर करें…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *