ब्रूस्टर का नियम क्या है, brewster law in hindi, बूस्टर के नियम

प्रकाश एक स्थान से दूसरे स्थान तक तरंगों के रूप में चलकर पहुंचता है यह तरंगे दो प्रकार की होती हैं अनुप्रस्थ तरंग तथा अनुदैर्ध्य तरंग।
प्रकाश की तरंगे अनुप्रस्थ तरंगे होती हैं।

ब्रूस्टर का नियम

जब अध्रुवित प्रकाश किसी पारदर्शी माध्यम (जैसे कांच) के पृष्ठ पर परावर्तित होता है तो यह आज ध्रुवित प्रकाश संपूर्ण रूप से समतल ध्रुवित हो जाता है। वैज्ञानिक ब्रूस्टर ने मत दिया कि परावर्तित प्रकाश में ध्रुवित प्रकाश की मात्रा आपतन कोण पर निर्भर करती है। तथा एक विशेष आपतन कोण के लिए परावर्तित प्रकाश पूर्ण रूप से समतल ध्रुवित हो जाता है। इस आपतन कोण को ध्रुवण कोण कहते हैं। इसे ip से प्रदर्शित करते हैं एवं इसके कंपन आपतन तल के लंबवत होते हैं।
ब्रूस्टर ने बताया कि पारदर्शी माध्यम के अपवर्तनांक तथा ध्रुवण कोण में निम्न संबंध होता है।

ब्रूस्टर का नियम क्या है
ब्रूस्टर का नियम

माना कांच का एक पृष्ठ है जिस पर AB आपतित किरण तथा BC परावर्तित किरण और BD अपवर्तित किरण है। इस पृष्ठ पर ip आपतन कोण तथा r अपवर्तन कोण है तो
स्नेल के नियम से
n = \large \frac{sini_p}{sinr}     समी.①
चित्र द्वारा ∠PBC + ∠CBD + ∠QBD = 180°
तो ∠ip + ∠CBD + ∠r = 180°     समी.②

चूंकि BC तथा BD परस्पर एक दूसरे के लंबवत है तो
∠CBD = 90°
तथा ip + r = 90°
या r = 90° – ip
समी.① में r तथा ∠CBD का मान रखने पर
n = \large \frac{sini_p}{sin(90 - i_p)}
n = \large \frac{sini_p}{cosi_p} ( चूंकि sin(90-θ) = cosθ)
\footnotesize \boxed { n = tani_p }
इस संबंध को ही ब्रूस्टर का नियम कहते हैं।

आपतन कोण तथा अपवर्तन कोण के बीच संबंध
समी. से
n = \large \frac{sini_p}{sinr}
अब ब्रूस्टर के नियम से
n = tanip
दोनों समीकरणों की तुलना करने पर
tanip = \large \frac{sini_p}{sinr}
\large \frac{sini_p}{cosi_p} = \large \frac{sini_p}{sinr}
sinr = cosip
sinr = sin(90 – ip)
r = 90 – ip
\footnotesize \boxed { r + i_p = 90° }

इस समीकरण से स्पष्ट है कि परावर्तित तथा अपवर्तित प्रकाश की किरणें परस्पर लंबवत होती हैं।

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