चल कुंडली धारामापी क्या है, परिभाषा, रचना, सिद्धांत और सुग्राहिता, वोल्टेज तथा धारा सुग्राहिता

हम कैसे कह सकते हैं कि किसी परिपथ में विद्युत धारा प्रवाहित हो रही है तथा किसी प्रतिरोधक के सिरों के बीच विभवान्तर है। इसी उद्देश्य में प्रयोग किए जाने वाले उपकरण (यंत्र) को चित्र में दर्शाया गया है। जिसे चल कुंडली धारामापी कहते हैं।

चल कुंडली धारामापी :-

यह विद्युत धारा के संसूचन (detection) तथा मापन में प्रयोग किए जाने वाला एक उपकरण है। चल कुंडली धारामापी की क्रिया चुंबकीय क्षेत्र में धारावाही कुंडली पर कार्यरत बल-आघूर्ण पर आधारित होती है। इसे चल कुंडली धारामापी कहते हैं।

चल कुंडली धारामापी की रचना :-

इसमें तांबे के पतले तारों से लिपटी एक कुंडली होती है। तथा यह कुंडली दो शक्तिशाली चुंबकों के बीच रखी जाती है। इस कुंडली से एक संकेतक लगाया जाता है। चित्र से स्पष्ट है।

चल कुंडली धारामापी का सिद्धांत :-

नर्म लोहे की क्रोड को शक्तिशाली चुंबकों के दो ध्रुवों के बीच लगाया जाता है। जब परिपथ में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है तो क्रोड के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न हो जाता है। यह क्रोड अनेकों फेरों वाली एक कुंडली होती है

चल कुंडली धारामापी क्या है, परिभाषा, रचना, सिद्धांत और सुग्राहिता
चल कुंडली धारामापी

जब कुंडली में i धारा प्रवाहित की जाती है तो कुंडली पर आरोपित बल आघूर्ण
τ = NiABsinθ

यहां N कुंडली में फेरों की संख्या, B चुंबकीय क्षेत्र तथा A कुंडली का क्षेत्रफल है। एवं उपरोक्त सूत्र में कुंडली पर अभिलंब समकोण दिशा में होगा। अर्थात θ = 0 तो बल आघूर्ण
τ = NiAB

माना साम्यावस्था में ऐंठन का कोण Φ रेडियन है। तथा ऐंठन बल-युग्म c हो तो ऐंठन कोण Φ के लिए बल युग्म का आघूर्ण cΦ होगा।

साम्यावस्था में
विक्षेपक बल युग्म का आघूर्ण = ऐंठन बल युग्म का आघूर्ण
NiAB = cΦ
i = \large \frac{c}{NBA}
अथवा     i = kΦ
जहां k एक नियतांक है। जिसे धारामापी का धारा परिवर्तन गुणांक कहते हैं। अतः
\footnotesize \boxed { i ∝ Φ }
तो इस प्रकार कुंडली में प्रवाहित धारा, उसमें उत्पन्न विक्षेप के अनुक्रमानुपाती होती है।

चल कुंडली धारामापी की सुग्राहिता :-

धारामापी में धारा तथा वोल्टेज दोनों की सुग्राहिता होती है।

धारामापी की धारा सुग्राहिता –
कुंडली में प्रवाहित धारा तथा उत्पन्न विक्षेप के अनुपात से मापी जाती है।
\footnotesize \boxed { धारा\,सुग्राहिता = \frac{Φ}{i} = \frac{NAB}{c} }
इस प्रकार N, A तथा B के मान बढ़ाकर और c का मान कम करके धारामापी की सुग्राहिता बढ़ाई जा सकती है।

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धारामापी की वोल्टेज सुग्रहिता –
यदि कुंडली के सिरों पर वोल्टेज हो तो चल कुंडली धारामापी की सुग्राहिता विक्षेप तथा वोल्टेज के अनुपात को कहते हैं।

वोल्टेज सुग्राहिता = \large \frac{Φ}{v}
वोल्टेज सुग्राहिता = \large \frac{Φ}{iR}     (ओम के नियम से v = iR)
का मान धारा सुग्राहिता के सूत्र से रखने पर
\footnotesize \boxed { धारा\,सुग्राहिता = \frac{NAB}{cR} }

इस प्रकार स्पष्ट है कि N, A तथा B का मान बढ़ाकर और c तथा R का मान कम करके चल कुंडली धारामापी की सुग्राहिता बढ़ाई जा सकती है।

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