क्रिस्टलीय तथा अक्रिस्टलीय ठोस में अंतर क्या है, गुण लिखिए

ठोसों को दो भागों में वर्गीकृत किया गया है –
(1) क्रिस्टलीय ठोस
(2) अक्रिस्टलीय ठोस

1. क्रिस्टलीय ठोस

वह ठोस जिनके अवयवी कण (परमाणु अणु या आयन) एक निश्चित ज्यामिति में व्यवस्थित रहते हैं। इस प्रकार के ठोस को क्रिस्टलीय ठोस (crystalline solid in Hindi) कहते हैं। क्रिस्टलीय ठोस का गलनांक तीक्ष्ण होता है। एवं इनकी गलन ऊष्मा निश्चित होती है।
जब गलित अवस्था में किसी ठोस को ठंडा किया जाता है तो ठोस अपनी मूल ज्यामिति पुनः प्राप्त कर लेता है। अर्थात् क्रिस्टलीय ठोस के अवयवी कणों की लगातार पुनरावृत्ति होती रहती है। इस प्रकार के ठोसों में अवयवी कण दीर्घ परास में व्यवस्थित होते हैं।

क्रिस्टलीय ठोस कठोर तथा असम पीडीए ता का गुण प्रदर्शित करते हैं क्योंकि इनका गलनांक निश्चित होता है अतः निश्चित आप से ऊपर उस्मा देने पर यह ठोस द्रव में बदलने लगते हैं अर्थात फोर्स करने लगते हैं क्रिस्टलीय ठोस वास्तविक ठोस ही होते हैं अधिकांश तत्व कृष्ण लिए ठोस ही होते हैं।
क्रिस्टलीय ठोस के उदाहरण
NaCl , C12H22O11 , डायमंड, क्वार्ट्ज, Au, Ag आदि।

क्रिस्टलीय तथा अक्रिस्टलीय ठोस
क्वार्ट्ज

2. अक्रिस्टलीय ठोस

वह ठोस जिनके अवयवी कण (परमाणु अणु या आयन) एक निश्चित ज्यामिति में व्यवस्थित नहीं रहते हैं। इस प्रकार के ठोस को अक्रिस्टलीय ठोस (amorphous solid in Hindi) कहते हैं।
अक्रिस्टलीय ठोस का गलनांक तीक्ष्ण नहीं होता है। अधिक ताप पर यह द्रव अवस्था में बदलने लगते हैं। अतः इनकी गलन ऊष्मा निश्चित नहीं होती है।
अक्रिस्टलीय ठोस में पुनरावृति का गुण नहीं पाया जाता है अर्थात यह गलित अवस्था के बाद पुनः अपनी ज्यामिति प्राप्त नहीं करते हैं। इस प्रकार के ठोसों में अवयवी कण लघु परास में व्यवस्थित होते हैं।

अक्रिस्टलीय ठोसों को अतिशीतित द्रव भी कहा जाता है। क्योंकि इनमें द्रव के समान बहने का गुण होता है।
उदाहरण –
कांच, रबर, मोम, प्लास्टिक तथा स्टार्च आदि अक्रिस्टलीय ठोस के उदाहरण हैं।

अक्रिस्टलीय ठोस के गुण

  1. इनमें लघु परास व्यवस्था पायी जाती है।
  2. इनमें संरचनात्मक इकाई की व्यवस्था द्रव के समान ही होती है इसलिए इन्हें अतिशीतित द्रव कहते हैं।
  3. इनकी गलन ऊष्माएं निश्चित नहीं होते हैं।
  4. यह वास्तविक ठोस से भिन्न होते हैं।

अक्रिस्टलीय ठोस के उपयोग

  • रबर एक अक्रिस्टलीय ठोस है इसका उपयोग टायरों, जूतों आदि विभिन्न प्रकार के उपकरणों में होता है।
  • कांच (अक्रिस्टलीय ठोस) का उपयोग घरों में, प्रयोगशाला में वाहनों आदि विभिन्न वस्तुओं में होता है।
  • प्लास्टिक (अक्रिस्टलीय ठोस) का प्रयोग कुर्सी, टेबल अधिक घरेलू उपकरणों तथा वाहनों के आवरण आदि में प्रयोग होता है।

क्रिस्टलीय तथा अक्रिस्टलीय ठोस में अंतर

  • क्रिस्टलीय ठोस में दीर्घ परासी व्यवस्था होती है जबकि अक्रिस्टलीय ठोस में लघु परासी व्यवस्था होती है।
  • क्रिस्टलीय ठोस विषम दैशिक प्रकृति के होते हैं जबकि अक्रिस्टलीय ठोस सम दैशिक प्रकृति के होते हैं।
  • क्रिस्टलीय ठोस का गलनांक निश्चित होता है जबकि अक्रिस्टलीय ठोस का गलनांक निश्चित नहीं होता है।
  • क्रिस्टलीय ठोस, वास्तविक ठोस होते हैं जबकि अक्रिस्टलीय ठोस आभासी ठोस अथवा अतिशीतित द्रव होते हैं।
  • क्रिस्टलीय ठोस की गलन ऊष्मा निश्चित होती है जबकि अक्रिस्टलीय ठोस की गलन ऊष्मा निश्चित नहीं होती है।
  • क्वार्ट्ज, हीरा, ग्रेफाइट, सोना तथा चांदी आदि क्रिस्टलीय ठोस के उदाहरण है जबकि कांच, प्लास्टिक, स्टार्च, रबर आदि अक्रिस्टलीय ठोस के उदाहरण हैं।

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