ठोसों में दोष | बिंदु दोष किसे कहते हैं, शाॅटकी, अंतराकाशी, रिक्तिका, धातु आधिक्य दोष

ठोसों में दोष

क्रिस्टल में अल्प अपूर्णताएं अवश्य पाई जाती हैं इन अपूर्णताओं को ही ठोसों में दोष (defects in solid in Hindi) कहते हैं।
ठोसों में दोष दो प्रकार के पायें जाते हैं।
(1) बिंदु दोष
(2) रेखीय दोष

बिंदु दोष

क्रिस्टल में किसी परमाणु के चारों ओर की आदर्श व्यवस्था में उत्पन्न दोष को बिंदु दोष (point defects in Hindi) कहते हैं।

बिंदु दोष के प्रकार

बिंदु दोष दो प्रकार के होते हैं-
(1) स्टोइकियोमीट्री दोष (रससमीकरण दोष)
(2) नाॅन-स्टोइकियोमीट्री दोष (अरससमीकरण दोष)

1. स्टोइकियोमीट्री दोष

वह दोष जिसके कारण क्रिस्टल में उपस्थित धनायनों तथा ऋणायनों का अनुपात परिवर्तित नहीं होता है। इस प्रकार के दोष को स्टोइकियोमीट्री दोष (stoichiometric defects in Hindi) कहते हैं।
स्टोइकियोमीट्री दोष निम्न प्रकार के होते हैं-
(a) शाॅटकी दोष
(b) फ्रेंकल दोष
(c) रिक्तिका दोष
(d) अंतराकाशी दोष

(a) शाॅटकी दोष

यह दोष साधारण आयनिक ठोसों द्वारा प्रदर्शित किया जाता है।
इस दोष में धनायन और ऋणायन अपने स्थान से हट जाते हैं। अर्थात् आयनिक यौगिकों के क्रिस्टल में जब विपरीत आयन सामान्य जालक स्थलों से अनुपस्थित हो जाते हैं। तो क्रिस्टल में रिक्तिकाएं उत्पन्न हो जाती हैं। इन रिक्तियों को ही शॉटकी दोष (Schottky defects in hindi) कहते हैं। शॉटकी दोष में धनायन और ऋणायन लगभग समान आकार के होते हैं। चित्र से स्पष्ट है।

ठोसों में दोष शाॅटकी दोष
शाॅटकी दोष

(b) फ्रेंकल दोष

सन 1930 ई० में वैज्ञानिक फ्रेंकल ने इस दोष के बारे में बताया।
यह दोष उस समय उत्पन्न होता है जब एक आयन अपनी जालक स्थिति को त्यागकर अंतराकाशी स्थिति को ग्रहण कर लेता है। तो क्रिस्टल में उत्पन्न दोष को फ्रेंकल दोष (Frankel defects in hindi) कहते हैं।
फ्रेंकल दोष का क्रिस्टल के घनत्व पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। चित्र में दर्शाया गया है।

फ्रेंकल दोष
फ्रेंकल दोष

(c) रिक्तिका दोष

जब क्रिस्टल में कुछ जालक स्थल रिक्त हो जाते हैं तब क्रिस्टल में रिक्तिका दोष (vacancy defects in hindi) उत्पन्न हो जाता है। यह दोष पदार्थ के घनत्व को कम कर देता है।

(d) अंतराकाशी दोष

जब कुछ अवयवी कण (परमाणु, अणु या आयन) अंतराकाशी स्थल पर पहुंच जाते हैं तो क्रिस्टल में एक दोष उत्पन्न हो जाता है। जिसे अंतराकाशी दोष (interstitial defects in hindi) कहते हैं। इस दोष से पदार्थ का घनत्व बढ़ जाता है।

अंतराकाशी दोष
अंतराकाशी दोष

अंतराकाशी स्थल, चार अवयवी कणों के बीच का स्थान होता है।

2. नाॅन-स्टोइकियोमीट्री दोष

जब क्रिस्टल में उपस्थित धनायनों तथा ऋणायनों की संख्या का अनुपात परिवर्तित हो जाता है तो क्रिस्टल में एक दोष उत्पन्न हो जाता है‌ जिसे नाॅन-स्टोइकियोमीट्री दोष कहते हैं।
यह दोस्त दो प्रकार के होते हैं।
(i) धातु आधिक्य दोष
(ii) धातु न्यूनता दोष

(i) धातु आधिक्य दोष

यह दोष क्रिस्टल में तब उत्पन्न होता है जब क्रिस्टल का एक ऋणायन अपनी स्थिति को त्यागकर एक छिद्र का निर्माण करता है और छिद्र में एक इलेक्ट्रॉन प्रवेश करता है। ताकि क्रिस्टल की विद्युत उदासीनता पर कोई प्रभाव न पड़े, तो इस प्रकार के दोष को धातु आधिक्य दोष कहते हैं।

(ii) धातु न्यूनता दोष

यह दोष तब उत्पन्न होता है जब धनायन अपनी जालक स्थिति में अनुपस्थित रहता है। और ऊंचे ऑक्सीकरण अवस्था में स्थित किसी पास के धातु आयन आवेश को संतुलित करता है। जिससे क्रिस्टल की विद्युत उदासीनता पर कोई प्रभाव न पड़े, तो क्रिस्टल के इस दोष को धातु न्यूनता दोष कहते हैं।

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