प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा | किसी तार को खींचने में किया गया कार्य

प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा

जब हम किसी तार को खींचते हैं तो हमें तार के अंतराण्विक बलों के विरुद्ध कुछ कार्य करना पड़ता है यह किया गया कार्य तार के अंतर्गत प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा के रूप में इकट्ठा हो जाता है।
माना तार की लंबाई L तथा अनुप्रस्थ क्षेत्रफल A है जब हम इस तार पर बल F लगाते हैं तो तार की लंबाई में वृद्धि l हो जाती है तब

अनुदैर्ध्य प्रतिबल = \frac{F}{A}
अनुदैर्ध्य विकृति = \frac{l}{L}
तो तार को यंग प्रत्यास्थता गुणांक Y = \frac{अनुदैर्ध्य\,प्रतिबल}{अनुदैर्ध्य\,विकृति}
Y = \frac{F/A}{l/L}
Y = \frac{FL}{Al}
तथा F = \frac{YAl}{L}     समी.①
अवतार को सूक्ष्म लंबाई dl तक खींचा जाता है तो किया गया कार्य
dW = बल × विस्थापन
समी.① से बल का मान रखने पर
dW = \frac{YAl}{L} × dl
अतः ∆l लंबाई तब खींचने में किया गया
W = \int dW
W = \int \frac{YA∆l}{L} × dl
W = \frac{YA}{L} \int ldl
समाकलन सूत्र xn = \frac{x^{n+1}}{n + 1} से
W = \frac{YA}{L} [\frac{l^2}{2}]
W = \frac{1}{2} × \frac{A}{L} × l^2 × \frac{L}{L} (L से गुणा-भाग)
W = \frac{1}{2} × Y × l^2 × \frac{l}{L} × (AL) \frac{l}{L}
W = \frac{1}{2} Y × l^2 × (\frac{l}{L})^2 × (AL)
अतः W = \frac{1}{2} × यंग गुणांक × (विकृति)2 × तार का आयतन
या W = \frac{1}{2} × प्रतिबल/विकृति × (विकृति)2 × आयतन
\footnotesize \boxed { W = \small \frac{1}{2} प्रतिबल × विकृति × आयतन }
यही कार्य तार में प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित हो जाती है तो
U = \frac{1}{2} प्रतिबल × विकृति × आयतन
अतः तार के प्रति एकांक आयतन में संचित ऊर्जा
\footnotesize \boxed { U = \frac{1}{2} प्रतिबल × विकृति }

पढ़ें… 11वीं भौतिक नोट्स | 11th class physics notes in Hindi

Note
इन सभी सूत्रों से संबंधित आंकिक प्रश्न (numerical) बहुत आते हैं इसलिए आप सभी इन सूत्रों को जरूर याद करें।

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