मानव नेत्र की संरचना कार्य विधि, सचित्र वर्णन नोट्स, human eye in hindi class 12

मानव नेत्र

नेत्र, मनुष्य के लिए एक बहुत महत्वपूर्ण अंग है। नेत्र के द्वारा ही हम इस रंग-बिरंगे संसार को देख पाते हैं। नेत्र में अनेक भाग होते हैं और उनके कार्य भी अलग-अलग होते हैं। आइए मानव नेत्र के बारे में विस्तार से चर्चा करते हैं।

मानव नेत्र की संरचना कार्य विधि
मानव नेत्र

दृढ़ पटल

नेत्र का गोलक बाहरी तरफ से एक दृढ़ तथा अपारदर्शी पदार्थ से ढका रहता है। इसे दृढ़ पटल कहते हैं।

कॉर्निया

नेत्र गोलक के सामने वाला भाग एक पारदर्शी तथा उठा (उभरा) हुआ होता है। इस उभरे भाग को कॉर्निया कहते हैं। कोई भी प्रकाश की किरण इसी कॉर्निया में से होकर प्रवेश करती है तभी हमें वस्तु दिखाई देती है।

पुतली

परितारिका या आइरिस के बीच में एक छोटा सा गोलाकार छिद्र होता है। जिसे पुतली कहते हैं। पुतली के द्वारा ही नेत्र में प्रवेश करने वाले प्रकाश की मात्रा पर निरंतर रखा जाता है।
जब आंख पर अधिक प्रकाश पड़ता है तो पुतली का आकार अपने आप ही छोटा तथा अंधेरे में जाने पर पुतली का आकार बड़ा हो जाता है। अतः पुतली के द्वारा ही नेत्र में प्रकाश की सीमित मात्रा ही प्रवेश करती है।

नेत्र लेंस

यह नेत्र का सबसे महत्वपूर्ण भाग है। पुतली के पिछले भाग में लेंस होता है यह लेंस कई परतों से मिलकर बनता है। इस लेंस का अपवर्तनांक अंदर से बाहर की ओर घटता जाता है। लेंस में अपनी फोकस दूरी को बदलने की क्षमता होती है यह अपने स्थान पर मांसपेशियों द्वारा बना रहता है। जब किसी वस्तु से आने वाली प्रकाश की किरण लेंस पर पड़ती है तो यह उसे अपवर्तित करके उसका उल्टा तथा वास्तविक प्रतिबिंब रेटिना पर बना देता है।

काचाभ द्रव

नेत्र लेंस के पीछे वाले भाग में एक पारदर्शी द्रव भरा रहता है। इसे काचाभ द्रव कहते हैं। इसका अपवर्तनांक 1.336 होता है।

समंजन क्षमता

जब नेत्र किसी दूर स्थित वस्तु को देखती है तो नेत्र की मांसपेशियों फैल जाती है। और तलों की वक्रता त्रिज्या बढ़ जाती है। इसे नेत्र की फोकस दूरी बढ़ जाती है और वस्तु स्पष्ट दिखाई देती है।
इसके विपरीत जब नेत्र किसी नजदीक की वस्तु को देखती है तो मांसपेशियों सिकुड़ जाती है और लेंस के तलों की वक्रता त्रिज्या घट जाती है। इसे लेंस की फोकस दूरी भी कम हो जाती है और वस्तु स्पष्ट दिखाई देती है।

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अतः नेत्र द्वारा फोकस दूरी को कम करने की क्षमता को नेत्र की समंजन क्षमता कहते हैं। एक स्वस्थ नेत्र की न्यूनतम दूरी 25 सेंटीमीटर होती है।

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