औषधि क्या है वर्गीकरण, ज्वरनाशी, प्रतिअम्ल, पीड़ाहारी, पूतिरोधी, प्रतिजैविक, औषधि या किसे कहते हैं उदाहरण

रसायन विज्ञान की वह शाखा जिसके अंतर्गत हम विभिन्न रसायनों के प्रयोग द्वारा रोगों के उपचार का अध्ययन करते हैं। उसे रसायन चिकित्सा कहते हैं।

रसायन विज्ञान का चिकित्सा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में औषधियों के रूप में प्रयोग होता है। औषधियां मनुष्य को रोगमुक्त करती हैं।
वह रासायनिक पदार्थ जो रोगों के निदान, निवारण तथा उपचार के लिए प्रयुक्त किए जाते हैं। उन रासायनिक पदार्थों को औषधियां (medicines in Hindi) कहते हैं।

औषधि का वर्गीकरण

NCERT Book के अनुसार औषधि को निम्न प्रकार से वर्गीकृत किया गया है।
1. औषध विज्ञान के आधार पर – पीड़ाहारी (दर्द में प्रयुक्त होती है), ज्वररोधी (बुखार में शरीर के ताप को कम करती है) , एंटीसेप्टिक तथा एंटीबायोटिक आदि।
2. औषध कार्य के आधार पर –
3. रासायनिक संरचना के आधार पर –
4. लक्ष्य अणुओं के आधार पर –

विभिन्न वर्गों में औषधियां

1. पीड़ाहारी

वे रसायनिक पदार्थ जो शरीर के दर्द या पीड़ा को बिना किसी चेतना-क्षीणता, मानसिक भ्रम तथा तंत्रिका तंत्र में या अन्य कोई अनियमितता उत्पन्न किए बिना दर्द को कम यह समाप्त करती हैं। उन्हें पीड़ाहारी कहते हैं। इन्हें दर्द नाशक भी कहते हैं। यह दो प्रकार की होती हैं।

(i) स्वापक पीड़ाहारी

इनका उपयोग बहुत तेज, असहनीय दर्द को रोकने में किया जाता है। तथा यह निंद्रा उत्पन्न करती हैं इसके लगातार उपयोग से मनुष्य को इसकी आदत पड़ सकती है। मॉरफीन, पैंथीडीन आदि इसके उदाहरण हैं।

(ii) अस्वापक पीड़ाहारी

इनका उपयोग सिर दर्द, कंकाल में दर्द आदि को रोकने के लिए किया जाता है। यह निंद्रा उत्पन्न नहीं करती हैं एवं इनके लगातार उपयोग से आदत भी नहीं पड़ती है। एस्प्रिन, पेरासिटामोल आदि इसके उदाहरण हैं।

2. प्रतिअम्ल

वह औषधि जो अमाशय में उत्पन्न अधिक अम्ल के प्रभाव को समाप्त कर देती हैं। उसे प्रतिअम्ल कहते हैं।
आमाशय में अम्ल का अत्यधिक होना, उत्तेजना एवं प्रेरणा देता है। तथा गंभीर अवस्था में यह अमाशय में घाव भी उत्पन्न कर देता है। अतः प्रतिअम्ल के उपयोग से दर्द में राहत तथा अम्लता दूर हो जाती है।
उदाहरण – डायजीन, ओमिप्रेजोल, म्यूकेन तथा रैनिटिडीन आदि प्रतिअम्ल के उदाहरण हैं।

3. प्रतिहिस्टैमिन

वह औषधि जो श्वसन नलिकाओं तथा आहारनली की चिकनी पेशियों को संकुचित करती है तथा रुधिर वहिकाओं जैसी पेशियों को नरम करती है। उसे प्रतिहिस्टैमिन कहते हैं। प्रतिहिस्टैमिन औषधियां, हिस्टैमिन की क्रिया में अवरोध उत्पन्न करती हैं। यह औषधियां सूजन, जलन तथा खुजली (एलर्जी) के प्रभाव को भी कम करती है। जिस कारण इसे प्रतिएलर्जी औषधि भी कहते हैं।
उदाहरण – ब्रोमफेनिरामिन, टरफेनाडीन आदि प्रतिहिस्टैमिन के उदाहरण है।

4. प्रशांतक

जो औषधियां तनाव तथा छोटी या बड़ी मानसिक बीमारियों को कम करने में प्रयुक्त होती है उन्हें प्रशांतक कहते हैं। प्रशांतक, तंत्रिकीय रूप से सक्रिय औषधि है।
उदाहरण – बेरोनल, सैकोनल, सेरोटोनिन, क्लोरोप्रोमजीन आदि प्रशांतक के उदाहरण हैं।

5. प्रति सूक्ष्मजैविक

वह औषधियां जो सूक्ष्म जीवों द्वारा उत्पन्न किए गए संक्रमण की वृद्धि को रोकती हैं। उसे प्रति सूक्ष्मजैविक (antimicrobials in Hindi) कहते हैं। यह ग्रहणकर्ता को बहुत कम या कोई भी हानि नहीं पहुंचाती हैं।
उदाहरण – टेट्रासाइक्लिन, पेनिसिलीन, क्लोरैम्फेनिकॉल आदि इसके उदाहरण हैं।
प्रति सूक्ष्मजैविक औषधियों के वर्ग में सल्फा औषधि तथा प्रतिजैविक प्रमुख हैं।

6. प्रतिजैविक

पेनिसिलीन प्रथम प्रभावी प्रतिजैविक है। वह औषधियां जो सूक्ष्म जीवों जैसे – बैक्टीरिया, वायरस, कवक, फफूंदी तथा अन्य सूक्ष्म जीवों की वृद्धि को रोकती है या समाप्त कर देती हैं। उन्हें प्रतिजैविक (antibiotics in Hindi) कहते हैं।
उदाहरण – पेनिसिलीन, स्ट्रेप्टोमाइसिन आदि प्रतिजैविक के उदाहरण हैं।

7. पूतिरोधी

वह रसायनिक पदार्थ है जो सूक्ष्म जीवों की वृद्धि को रोकते हैं या उन्हें नष्ट कर देते हैं। लेकिन जीव ऊतकों को हानि नहीं पहुंचाते हैं। उन्हें पूतिरोधी कहते हैं।
उदाहरण – सोफरोमाइसीन, फ्यूरासिन आदि पूतिरोधी के उदाहरण हैं।

8. विसंक्रामी

वह रसायनिक पदार्थ जो निर्जीव वस्तुओं – जैसे फर्श, नालियां, यंत्र तथा शौचालय आदि के संपर्क में आने वाले सूक्ष्म जीवों को नष्ट करते हैं। उन्हें विसंक्रामी कहते हैं।
उदाहरण – फिनोल का 1% विलयन विसंक्रामी का उदाहरण है।


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