भौतिक तथा रासायनिक अधिशोषण क्या है अंतर बताइए, परिभाषा, लक्षण

अधिशोषण के प्रकार

अधिशोषण क्या है इसके बारे में हम पिछले लेख में पढ़ चुके हैं। प्रस्तुत लेख में अधिशोषण के प्रकार के बारे में हम पूर्ण अध्ययन करेंगे।
अधिशोषण दो प्रकार के होते हैं।
(1) भौतिक अधिशोषण
(2) रासायनिक अधिशोषण

1. भौतिक अधिशोषण

जब अधिशोषक की सतह तथा अधिशोषित पदार्थ के मध्य दुर्बल वांडरवाल बल होता है तो यह भौतिक अधिशोषण (physical adsorption in Hindi) कहलाता है।
जैसे – तख्ते पर स्याही से लिखने पर स्याही का अवशोषण एक भौतिक अधिशोषण का उदाहरण है।
भौतिक अवशोषण ताप के बढ़ने पर बढ़ता है चूंकि इसके मध्य दुर्बल वांडरवाल बल होता है।

भौतिक अधिशोषण के प्रमुख लक्षण

1. ताप का प्रभाव
ताप वृद्धि करने पर भौतिक अधिशोषण में कमी आ जाती है क्योंकि ताप वृद्धि करने पर वांडरवाल बल प्रबल होने लगते हैं।

2. दाब का प्रभाव
दाब में वृद्धि करने पर भौतिक अधिशोषण में भी वृद्धि होती है।

3. उत्क्रमणीय प्रकृति
भौतिक अधिशोषण एक उत्क्रमणीय प्रक्रम है। अतः किसी ठोस सतह पर अधिशोषित गैस को, ताप में वृद्धि करके या दाब में कमी करके सरलता से सतह से पृथक किया जा सकता है।

2. रासायनिक अधिशोषण (रसोवशोषण)

अधिशोषण की सतह पर अधिशोषित पदार्थ रसायनिक बंधों द्वारा बंधे रहते हैं। तो यह रासायनिक अधिशोषण (chemical adsorption in Hindi) कहलाता है। तथा इसे रसोवशोषण भी कहते हैं।
जैसे – पोलेडियम Pd की सतह पर हाइड्रोजन का अधिशोषण, रासायनिक अधिशोषण का एक उदाहरण है।

रासायनिक अधिशोषण के लक्षण

1. ताप का प्रभाव
ताप वृद्धि करने पर रासायनिक अधिशोषण में पहले वृद्धि होती है परंतु बाद में कमी होने लगती है।

2. अनुत्क्रमणीय प्रकृति
रासायनिक अधिशोषण एक अनुत्क्रमणीय प्रक्रम है यही रासायनिक अधिशोषण में यौगिक बनने का कारण है। क्योंकि रसोवशोषण एक ऊष्माक्षेपी प्रक्रम है।

3. पृष्ठीय क्षेत्रफल
भौतिक अधिशोषण के समान ही रासायनिक अधिशोषण भी पृष्ठीय क्षेत्रफल पर निर्भर करता है। अर्थात क्षेत्रफल बढ़ाने पर रासायनिक अधिशोषण का मान बढ़ता है।

भौतिक तथा रासायनिक अधिशोषण में अंतर

क्रमांकभौतिक अधिशोषणरासायनिक अधिशोषण
1यह दुर्बल वांडरवाल बलों के कारण उत्पन्न होता है।यह रसायनिक बंधों से बनने के कारण होते हैं।
2यह पृष्ठीय क्षेत्रफल बढ़ाने पर बढ़ता है।यह भी पृष्ठीय क्षेत्रफल बढ़ाने पर बढ़ता है।
3ताप में वृद्धि करने पर भौतिक अधिशोषण में कमी हो जाती है।ताप वृद्धि करने पर पहले इसमें वृद्धि होती है परंतु बाद में कमी होने लगती है।
4इसकी सक्रियण ऊर्जा नहीं होती है अर्थात सक्रियण ऊर्जा शून्य होती है।इसकी सक्रियण ऊर्जा अधिक होती है।
5यह प्रकृति में विशिष्ट नहीं होते हैं।यह प्रकृति में अत्यधिक विशिष्ट होते हैं।
6यह प्रकृति में उत्क्रमणीय होते हैं।यह प्रकृति में अनुत्क्रमणीय होते हैं।

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