अभिक्रिया की दर (वेग) क्या है, मात्रक, ताप और दाब पर निर्भर, प्रभाव समझाइए

अभिक्रिया का वेग (दर)

इकाई समय में अभिकारक या उत्पाद की सांद्रता में होने वाले परिवर्तन की दर को रसायनिक अभिक्रिया की दर या अभिक्रिया का वेग (rate of reaction in Hindi) कहते हैं।
यदि ∆T समय अंतराल में अभिकारक या उत्पाद की सांद्रता में परिवर्तन ∆C हो तो
अभिक्रिया का वेग = \frac{अभिकारक/उत्पाद\,की\,सांद्रता\,में\,परिवर्तन}{समय\,में\,परिवर्तन}
\footnotesize \boxed { ∆R = \frac{∆C}{∆T} }

अभिक्रिया के वेग का मात्रक

यदि अभिकारक या उत्पाद की सांद्रता मोल/लीटर में हो तथा समय सेकंड में हो तो अभिक्रिया की दर (वेग) का मात्रक मोल/लीटर-सेकंड होता है।
अभिक्रिया की दर का मात्रक वायुमंडल/सेकंड भी होता है।

अभिक्रिया की तात्क्षाणिक दर

किसी निश्चित समय पर अभिक्रिया की दर उसकी तात्क्षाणिक दर कहलाती है।
यदि किसी निश्चित समय ∆T पर अभिकारक या उत्पाद की सांद्रता में परिवर्तन ∆C हो तो
\footnotesize \boxed { तात्क्षाणिक\,दर = \frac{∆C}{∆T} }

अभिक्रिया की दर को प्रभावित करने वाले कारक

1. ताप का प्रभाव

सामान्यतः ताप बढ़ाने पर अभिक्रिया की दर बढ़ जाती है। अतः किसी रासायनिक अभिक्रिया में 10 डिग्री सेंटीग्रेड (10°C) ताप में वृद्धि की जाए तो अभिक्रिया का वेग दोगुना हो जाएगा।

2. दाब का प्रभाव

दाब बढ़ाने पर अभिक्रिया की दर प्रभावित होती है। अर्थात अभिक्रिया की दर में वृद्धि होती है। चूंकि दाब वृद्धि पर उत्पादों का आयतन कम हो जाता है।

3. अभिकारकों की सांद्रता पर

स्थिर ताप पर किसी अभिक्रिया की दर अभिकारकों की सांद्रता के अधिक होने पर अधिक होती है। क्योंकि सांद्रता बढ़ाने पर आण्विक टक्करें होती हैं।

4. उत्प्रेरक की उपस्थिति पर

सामान्यतः उत्प्रेरक उसे कहते हैं जो किसी रसायनिक अभिक्रिया का वेग बढ़ा देता है परंतु स्वयं अभिक्रिया में भाग नहीं लेता है। अर्थात् उत्प्रेरक की उपस्थिति में अभिक्रिया की दर बढ़ जाती है।

5. अभिकारक के पृष्ठ क्षेत्रफल पर

जब अभिकारकों का पृष्ठ क्षेत्रफल अधिक होता है तो फलस्वरुप उनकी अभिक्रिया की दर भी अधिक होती है।
अतः किसी अभिक्रिया में एक बड़े टुकड़े की अपेक्षा छोटे-छोटे टुकड़े प्रयोग किए जायें तो उनका पृष्ठ क्षेत्रफल अधिक होगा। जिसके कारण उनकी अभिक्रिया की दर भी उतनी ही अधिक होगी।


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