नाभिक की संरचना | नाभिक का आकार structure of nucleus in hindi, size

नाभिक की संरचना

वैज्ञानिक रदरफोर्ड में अल्फा-कण प्रकीर्णन प्रयोग द्वारा यह पता लगाया कि किसी परमाणु का समस्त धन आवेश परमाणु के केंद्र में एकत्रित रहता है। एवं इलेक्ट्रॉन (ऋण आवेश) इसके चारों ओर गति करते रहते हैं। इस केंद्र के भाग को परमाणु का नाभिक कहते हैं। नाभिक की त्रिज्या 10-15 मीटर होती है। एवं पूरे परमाणु की त्रिज्या 10-10 मीटर होती है इस प्रकार नाभिक की त्रिज्या परमाणु की त्रिज्या के दस हजारवें भाग के बराबर होती है।

इसी बीच सन 1919 ई० में रदरफोर्ड ने प्रोटॉन की खोज की और बताया कि प्रोटोन का द्रव्यमान, हाइड्रोजन के नाभिक के द्रव्यमान के बराबर होता है, एवं इस पर धन आवेश होता है। परमाणु के नाभिक में प्रोटॉन ही उपस्थित होते हैं। किसी परमाणु के नाभिक में उपस्थित प्रोटॉन, उस परमाणु के परमाणु क्रमांक के बराबर होते हैं।

सन 1932 ई० में न्यूट्रॉन की खोज हुई और यह माना गया कि न्यूट्रॉन पर कोई आवेश नहीं होता है। लेकिन इसका द्रव्यमान लगभग प्रोटोन के बराबर ही होता है न्यूट्रॉन के यह गुण, प्रोटोन के गुणों के साथ मिलकर नाभिक का रूप ले लेते हैं।
अतः अंत में यह माना गया कि परमाणु के नाभिक में न्यूट्रॉन और प्रोटॉन उपस्थित होते हैं। प्रोटोन पर धन आवेश होता है एवं न्यूट्रॉन पर कोई आवेश नहीं होता है, यह आवेशहीन होता है। एवं न्यूट्रॉन का द्रव्यमान होता है प्रोटोन तथा न्यूट्रॉन की संख्या परमाणु के कुल द्रव्यमान के बराबर होती है।

नाभिक का आकार

रदरफोर्ड ने पतले स्वर्ण पत्रों पर अल्फा-कण प्रकीर्णन प्रयोग द्वारा नाभिक के आकार का पता लगाया। कि नाभिक का आयतन उसमें उपस्थित न्यूक्लिऑनों की संख्या के अनुक्रमानुपाती होता है।
माना न्यूक्लिऑनों की संख्या A हो तथा नाभिक की त्रिज्या R है तब
चूंकि परमाणु का आकार गोलाकार होता है तब गोले का आयतन \large \frac{4}{3} πR3 होगा। अतः
\large \frac{4}{3} πR3 ∝ A
या R3 ∝ A
R = A1/3
\footnotesize \boxed { R = R_0 A^{1/3} }

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जहां R0 एक नियतांक है इस नियतांक का प्रयोग द्वारा प्राप्त मान 1.2 × 10-15 मीटर के लगभग होता है। चूंकि 19 न्यूक्लिऑनों की संख्या भिन्न-भिन्न परमाणुओं के लिए भिन्न-भिन्न होती है।
इसलिए नाभिकों की त्रिज्याएं भी भिन्न-भिन्न परमाणुओं के लिए भिन्न-भिन्न होती हैं।
न्यूक्लिऑनों की संख्या, न्यूट्रॉन और प्रोटॉन की संख्या के बराबर होती है अतः
न्यूक्लिऑनों की संख्या = प्रोटॉन + न्यूट्रॉन की संख्या

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