सल्फर डाइऑक्साइड क्या है, उपयोग, बनाने की विधि, सूत्र, भौतिक व रासायनिक गुण

सल्फर डाइऑक्साइड

सल्फर के अनेक ऑक्साइड हैं। जिनमें से सल्फर डाइऑक्साइड प्रमुख है। इसका अणुसूत्र SO2 होता है। यह वायु से लगभग 2.2 गुनी भारी है।

सल्फर डाइऑक्साइड बनाने की विधि

सल्फर डाइऑक्साइड बनाने की अनेक विधियां हैं जिनमें से प्रयोगशाला और औद्योगिक विधियां महत्वपूर्ण हैं।

1. सल्फर डाइऑक्साइड बनाने की प्रयोगशाला विधि

प्रयोगशाला में सल्फर डाइऑक्साइड को सल्फाइड तथा सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल की आपस में क्रिया करके प्राप्त किया जाता है।
\scriptsize \begin{array}{rcl} Na_2SO_2 \\ सोडियम\,सल्फाइड \end{array} + \scriptsize \begin{array}{rcl} H_2SO_4 \\ सांद्र \end{array} \longrightarrow Na2SO4 + H2O + \scriptsize \begin{array}{rcl} SO_2 \\ सल्फर\,डाइऑक्साइड \end{array}

2. औद्योगिक उत्पादन

सल्फर डाइऑक्साइड को औद्योगिक स्तर पर सल्फाइड अयस्कों के भर्जन से सहउत्पाद के रूप में प्राप्त किया जाता है।
4FeS2 + 11O2 \longrightarrow 2Fe2O3 + 8SO2

3. सल्फर डाइऑक्साइड, सल्फर को वायु में जलाने पर प्राप्त की जाती है।
S + O2 \longrightarrow SO2

सल्फर डाइऑक्साइड के भौतिक गुण

  1. सल्फर डाइऑक्साइड रंगहीन, तीव्र गंध वाली गैस है।
  2. यह जल में अत्यधिक विलेय है।
  3. यह वायु से भारी होती है।
  4. यह कमरे के ताप तथा दो वायुमंडलीय दाब पर ही द्रवित हो जाती है।

सल्फर डाइऑक्साइड के रसायनिक गुण

  • सल्फर डाइऑक्साइड को जल में प्रवाहित करने पर सल्फ्यूरस अम्ल प्राप्त होता है।
    SO2 + H2O \longrightarrow H2SO3
  • यह सोडियम हाइड्रोक्साइड के साथ अभिक्रिया करके सरलता से सोडियम सल्फाइड बना देती है।
    2NaOH + SO2 \longrightarrow Na2SO3 + H2O
  • सल्फर डाइऑक्साइड, क्लोरीन के साथ चारकोल उत्प्रेरक की उपस्थिति में अभिक्रिया करके सल्फ्यूरिक क्लोराइड का निर्माण करता है।
    SO2 + Cl2 \longrightarrow SO2Cl2
  • SO2, वैनेडियम ऑक्साइड उत्प्रेरक की उपस्थिति में ऑक्सीजन द्वारा ऑक्सीकृत होकर सल्फर डाइऑक्साइड बनाता है।
    2SO2 + O2 \xrightarrow {V_2O_5} 2SO3

सल्फर डाइऑक्साइड के उपयोग

  1. सल्फर डाइऑक्साइड का उपयोग ऊन एवं रेशम की विरंजन में होता है।
  2. इसका उपयोग शर्करा एवं पेट्रोलियम के शोधन में किया जाता है।
  3. इसका उपयोग अनेक कार्बनिक तथा अकार्बनिक रसायनों के लिए विलायक के रूप में किया जाता है।
  4. यह विसंक्रामक तथा परिरक्षक के रूप में प्रयोग होता है।

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