आरेनियस का सिद्धांत, अवधारणा के लक्षण का महत्व | आर्हीनियस समीकरण लिखिए

आरेनियस का सिद्धांत

इस सिद्धांत के अनुसार, अम्ल वे पदार्थ होते हैं जो जलीय विलयन में H+ आयन देते हैं। तथा क्षार वे पदार्थ होते हैं जो जलीय विलयन में OH आयन देते हैं। अतः यह सिद्धांत जलीय माध्यम में अम्ल व क्षार की व्याख्या करता है।

आर्हीनियस अवधारणा

1. किसी विद्युत अपघट्य को जल या किसी अन्य ध्रुवीय विलायक में विलीन करने पर विद्युत अपघट्य के अणु स्वतः धन और ऋण आवेशित आयनों में विभाजित हो जाते हैं।
जैसे – नमक को जल में मिलाने पर यह Na+ और Cl आयनों में वियोजित हो जाता है।
NaCl \longrightarrow Na+ + Cl

2. किसी विद्युत अपघट्य के विलयन में उपस्थित धन आयनों का कुल धन आवेश,ऋण आयनों के कुल ऋण आवेश के बराबर होता है। अर्थात विद्युत अपघट्य का विलयन उदासीन होता है।
3. विद्युत अपघट्य के विलयन में विद्युत धारा का प्रवाह विलयन में उपस्थित मुक्त आयनों की संख्या द्वारा होता है।

4. विलयन में विद्युत अपघट्य का कुछ ही भाग वियोजित (आयनित) होता है। इस भाग को विद्युत अपघट्य की वियोजन की मात्रा या आयनन की मात्रा कहते हैं।
\footnotesize \boxed { आयनन\,की\,मात्रा = \frac{आयनित\,अणुओं\,की\,संख्या}{अणुओं\,की\,कुल\,संख्या} }

5. स्थिर ताप पर किसी विद्युत अपघट्य के विलयन की विद्युत चालकता विलयन में उपस्थित आयनों की प्रकृति तथा आयनों की संख्या एवं विलायक की प्रकृति पर निर्भर करती है।

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आरेनियस के विद्युत अपघटनी वियोजन सिद्धांत के आधार पर विद्युत अपघट्य की विद्युत चालकता और अन्य गुणों की व्याख्या की जा सकती है।

अम्ल और क्षारक

आरेनियस की अम्ल क्षारक संकल्पना के अनुसार अम्ल जल में वियोजित होकर केवल हाइड्रोजन आयन H+ तथा क्षार जल में वियोजित होकर केवल हाइड्रोक्साइड आयन OH देते हैं। जैसे –
\scriptsize \begin{array}{rcl} HCl \\ अम्ल \end{array} \longrightarrow H+ + Cl
\scriptsize \begin{array}{rcl} NaOH \\ क्षारक \end{array} \longrightarrow Na+ + OH

अम्लों के विलयनों में अम्लीय गुण हाइड्रोजन आयन H+ के गुण होते हैं। और क्षार के विलयनों में क्षारीय गुण हाइड्रोक्साइड आयन OH के गुण होते हैं।

Note – जो अम्ल जलीय विलयन में सभी सांद्रताओं पर पूर्ण रूप से आयनित हो जाते हैं। उन्हें प्रबल अम्ल कहते हैं। ठीक इसी प्रकार जो क्षारक जलीय विलयन में सभी सांद्रताओं पर पूर्ण रूप से आयनित हो जाते हैं तब उन्हें प्रबल क्षारक कहते हैं।
जैसे – हाइड्रोक्लोरिक अम्ल HCl, नाइट्रिक अम्ल HNO3, सल्फ्यूरिक अम्ल H2SO4 आदि प्रबल अम्ल है। तथा सोडियम हाइड्रोक्साइड NaOH, पोटेशियम हाइड्रोक्साइड KOH तथा बेरियम हाइड्रोक्साइड Ba(OH)2 आदि प्रबल क्षारक हैं।

एवं जो अम्ल और क्षार जलीय विलयन में आंशिक रूप से आयनित होते हैं। तो उन्हें दुर्बल अम्ल और दुर्बल क्षारक कहा जाता है।
जैसे – CH3COOH, HF, H2S दुर्बल अम्ल हैं तथा NH3, C6H5NH2, C6H5N दुर्बल क्षारक है।


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