हार्डी शुल्जे नियम की व्याख्या पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए, रक्षी कोलाइड, स्वर्ण संख्या

स्कंदन

विद्युत अपघट्य के विलयन द्वारा कोलाइडी विलयन को अवक्षेपित करने की प्रक्रिया को स्कंदन या अवक्षेपण कहते हैं।
हार्डी शुल्जे नियम, स्कंदन की व्याख्या करता है।

हार्डी शुल्जे नियम

इस नियम के दो कथन हैं।
(1) किसी कोलाइडी विलयन को अवक्षेपित करने के लिए विपरीत आवेशित आयनों की आवश्यकता होती है।
(2) किसी आयन पर जितना अधिक आवेश होगा उसकी स्कंदन क्षमता उतनी ही अधिक होगी।

सामान संयोजकता वाले आयनों की स्कंदन क्षमता समान होती है। एवं ज्यादा संयोजकता वाले आयनों की क्षमता अधिक होती है। इससे स्पष्ट होता है कि आयनों की स्कंदन क्षमता बढ़ने पर उनकी संयोजकता बढ़ती है।
जैसे – धनायनों की स्कंदन क्षमता का क्रम
Na+ < Mg2+ < Al3+ < Sn4+
ऋणायनों की स्कंदन क्षमता का क्रम
Cl < SO42- < PO43- < [Fe(CN)6]4-

Note –
किसी विद्युत अपघट्य के लिए स्कंदन का मान जितना कम होता है उस विद्युत अपघट्य की स्कंदन क्षमता का मान उतना ही अधिक होता है।
\footnotesize \boxed { स्कंदन\,मान ∝ \frac{1}{स्कंदन\,क्षमता} }

रक्षी कोलाइड

जब किसी द्रव विरोधी कोलाइड का द्रव स्नेही कोलाइड की उपस्थिति में विद्युत अपघट्य द्वारा स्कंदन रुक जाता है। तो उसे रक्षण कहते हैं। अर्थात् द्रव स्नेही कोलाइड, द्रव विरोधी कोलाइड की विद्युत अपघट्य द्वारा स्कंदन से रक्षा करता है रक्षी कोलाइड (protective colloid in Hindi) कहलाता है।

स्वर्ण संख्या

स्वर्ण संख्या, रक्षी कोलाइड में रक्षण प्रभाव को मापने की एक इकाई है इसके अनुसार,
किसी रक्षी कोलाइड की मिलीग्राम में वह मात्रा जो गोल्ड सोल के 10 ग्राम में 10% NaCl के 1 मिलीलीटर विलयन द्वारा स्कंदित होने से रोक देती है। स्वर्ण संख्या (gold number in Hindi) कहलाती है।
• स्वर्ण संख्या का मान जितना अधिक होगा, रक्षी कोलाइड की रक्षण क्षमता उतनी ही कम होगी।
• सबसे अधिक स्वर्ण संख्या स्टार्च (25) की होती है एवं सबसे कम स्वर्ण संख्या जिलेटिन (0.005) की होती है।


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