परिवहन किसे कहते हैं, प्रकार, परिभाषा | मानव परिवहन तंत्र

सभी जीवित कोशिकाओं को भोजन व ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। तथा उपापचय के फलस्वरुप बने उत्सर्जी पदार्थ को कोशिकाओं से हटाना भी उतना ही जरूरी होता है। यह कार्य परिवहन या संवहन तंत्र द्वारा संपन्न होता है।

परिवहन

वह जैव प्रक्रिया जिसमें शरीर के एक भाग द्वारा अवशोषित तथा संश्लेषित पदार्थ का दूसरे भागों तक स्थानांतरण होता है। उसे परिवहन (circulation in Hindi) कहते हैं।
परिवहन केवल लाभदायक पदार्थ का ही नहीं होता है बल्कि अपशिष्ट पदार्थों को भी शरीर के ऐसे स्थान पर स्थानांतरित किया जाता है। जहां से उसे बाहर निकाला जा सके। जिस परिवहन तंत्र में संवहन मध्य रुधिर होता है उसे रुधिर परिवहन तंत्र कहते हैं।

मानव में परिवहन

मानव तथा उच्च श्रेणी के जंतुओं में एक पूर्ण विकसित परिवहन तंत्र (human circulation system in Hindi) होता है। इसके निम्नलिखित अवयव होते हैं।
1. रुधिर
2. हृदय
3. रुधिर वाहिनियां
4. लसीका

1. रुधिर – रुधिर एक तरल माध्यम है। जो शरीर में प्रवाहित होकर पदार्थों का परिवहन करता है।
2. हृदय – हृदय एक प्रकार का पंप है। जो रुधिर के प्रभाव हेतु आवश्यक दाब उत्पन्न करता है।
3. रुधिर वाहिनियां – रुधिर वाहिनियां ऐसी नलिकाएं होती हैं। जिनमें से प्रवाहित होकर रुधिर एक भाग से दूसरे भागों तक जाता है।
4. लसीका – लसीका एक तरल माध्यम होता है। जो रुधिर वाहिनियों से कोशिकाओं तक पदार्थ का परिवहन करता है।

रुधिर परिवहन तंत्र

रुधिर एक तरल संयोजी ऊतक है। रुधिर में एक तरल माध्यम होता है। जिसे प्लाज्मा कहते हैं। प्लाज्मा भोजन, कार्बन डाइऑक्साइड तथा नाइट्रोजनी वर्ज्य पदार्थों का विलीन रूप में परिवहन करता है।
रुधिर में पाए जाने वाली कोशिकाओं को रुधिर कणिकाएं कहते हैं। रुधिर कणिकाएं तीन प्रकार की होती हैं।
1. लाल रुधिर कणिकाएं
2. श्वेत रुधिर कणिकाएं
3. रुधिर प्लेटलेट्स

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Note – लाल रुधिर कणिकाओं को कहीं-कहीं पर लाल रक्त कणिकाएं भी लिख दिया जाता है। क्योंकि रुधिर, लहू, रक्त यह सब खून के ही पर्यायवाची हैं।

1. लाल रुधिर कणिकाएं

मनुष्य में लाल रुधिर कणिकाएं छोटी, चपटी, गोल तथा दोनों ओर से दबी हुई होती हैं। इसमें केंद्रक नहीं होता है। लाल रुधिर कणिकाओं का निर्माण लाल अस्थिमज्जा में होता है। लाल रुधिर कणिकाओं में लौहयुक्त प्रोटीन पाया जाता है जिसे हीमोग्लोबिन कहते हैं। इसका रंग लाल होता है। इसी कारण लाल रुधिर कणिकाएं लाल होती हैं। हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन तथा कार्बन डाइऑक्साइड का परिवहन करता है।

2. श्वेत रुधिर कणिकाएं

श्वेत रुधिर कणिकाओं में हीमोग्लोबिन अनुपस्थित होता है। जिस कारण यह श्वेत रंग की होती हैं। इनका कोई निश्चित आकार नहीं होता है श्वेत रुधिर कणिकाओं की संख्या भी लाल रुधिर कणिकाओं की संख्या की अपेक्षा कम होती है। इनमें केंद्रक उपस्थित होता है। श्वेत रुधिर कणिकाएं दो प्रकार की होती हैं।
(a) कणिकामय या ग्रेन्यूलोसाइट्स
(b) कणिकारहित या अग्रेन्यूलोसाइट्स

3. रुधिर प्लेटलेट्स

रुधिर प्लेटलेट्स केवल मनुष्य के रुधिर में पाई जाती हैं। इन्हें थ्राम्बोसाइट्स भी कहते हैं। इनकी संख्या श्वेत रुधिर कणिकाओं की संख्या से लगभग 40 गुना अधिक होती है। ये रुधिर का थक्का बनाने में सहायक होती हैं जिससे रक्त स्राव रुक जाता है। एवं कटा हुआ स्थान रुधिर के थक्के से ढककर जीवाणुओं तथा धूल आदि से सुरक्षित हो जाता है।

दोहरा परिवहन

मनुष्य में रुधिर परिवहन में दो परिवहन पथ होते हैं।
(i) पहले परिवहन पथ में हृदय के दाहिनी ओर से शरीर का समस्त अशुद्ध रुधिर एकत्रित होकर फेफड़ों में शुद्धिकरण के लिए पहुंच जाता है तथा
(ii) दूसरे परिवहन पथ में हृदय के बायीं ओर से फेफड़े द्वारा एकत्रित शुद्ध रुधिर समस्त शरीर में पम्प किया जाता है। इस तरह के रुधिर परिभ्रमण को दोहरा परिवहन (double circulation) कहते हैं। इस प्रकार मानव में रुधिर दो बार हृदय से गुजरता है।


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StudyNagar

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