ला शातेलिए का सिद्धांत क्या है नियम का उल्लेख कीजिए, अनुप्रयोग, ताप और दाब का प्रभाव

साम्य की स्थिति ताप, दाब और सांद्रण परिवर्तनों पर निर्भर करती है। इनके मान में परिवर्तन करने पर साम्य की स्थिति प्रभावित होती है। साम्य पर विभिन्न कारकों के प्रभाव का गुणात्मक अध्ययन एक सिद्धांत द्वारा किया जाता है। जिसे ला शातेलिए का सिद्धांत (le chatelier principle in Hindi) कहते हैं।

ला शातेलिए का सिद्धांत

इस सिद्धांत के अनुसार, यदि साम्यावस्था निकाय के किसी कारक जैसे ताप, दाब और सांद्रण में परिवर्तन किया जाता है। तो निकाय उस दिशा में विस्थापित होता है जिधर किए गए परिवर्तन का प्रभाव निरस्त होता है।
यह सिद्धांत एक सार्वभौमिक सिद्धांत है। जो सभी भौतिक व रासायनिक तत्वों पर लागू होता है।
ला शातेलिए नियम की सहायता से किसी भी भौतिक व रासायनिक साम्य पर ताप, दाब और सांद्रण परिवर्तनों के प्रभाव का सुगमतापूर्वक पूर्ण अनुमान किया जा सकता है।

इस सिद्धांत द्वारा निम्न अनुमान निकाले जा सकते हैं।
1. ताप वृद्धि पर साम्य में उस दिशा में विस्थापित होता है जहां पर ऊष्मा का शोषण होता है।
2. दाब वृद्धि पर साम्य उस दिशा में विस्थापित होता है जहां पर आयतन कम होता है।
3. साम्य मे उपस्थिति किसी पदार्थ की सांद्रता वृद्धि पर साम्य उस दिशा में विस्थापित होता है जिधर उस पदार्थ का की खपत कम होती है।

ला शातेलिए नियम के अनुप्रयोग

ला शातेलिए नियम का अनुप्रयोग भौतिक व रासायनिक दोनों प्रकार के साम्य पर किया जाता है।

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1. ला शातेलिए नियम की भौतिक अनुप्रयोग

ला शातेलिए नियम के अनुसार, ताप वृद्धि पर साम्य उस दिशा में विस्थापित होता है जिधर ऊष्मा अवशोषित होती है एवं इसके विपरीत ताप कमी पर साम्य में उस दिशा में विस्थापित होता है। जहां ऊष्मा उत्सर्जित होती है।
अतः जो पदार्थ घुलने पर ऊष्मा का शोषण करते हैं उनकी विलेयता ताप बढ़ाने पर बढ़ती है जैसे –
KCl(s) + H2O \rightleftharpoons KCl विलयन – ऊष्मा
चूंकि ठोस KCl को जल में घोलने पर यह ऊष्मा अवशोषित करती है। अतः ताप बढ़ाने पर KCl की जल में विलेयता बढ़ती है।

Note – कुछ पदार्थों को जल में विलेय करने पर यह ऊष्मा उत्सर्जित करते हैं। तब इन पदार्थों की जल में विलेयता ताप बढ़ाने पर घटती है। जैसे – सोडियम हाइड्रोक्साइड NaOH, कैल्शियम एसीटेट, कैलशियम हाइड्रोक्साइड आदि।

2. ला शातेलिए नियम की रासायनिक अनुप्रयोग

रसायनिक साम्य पर ताप, दाब और सांद्रण परिवर्तन के प्रभाव का गुणात्मक अध्ययन निम्न प्रकार किया जाता है।
नाइट्रोजन और ऑक्सीजन के संयोग से नाइट्रिक ऑक्साइड का निर्माण
N2(g) + O2(g) \rightleftharpoons 2NO(g) — 43200 कैलोरी
(i) ताप का प्रभाव – NO का बनना एक ऊष्माशोषी अभिक्रिया है। अतः ला शातेलिए नियम के अनुसार ताप वृद्धि पर साम्य अग्र दिशा में विस्थापित होता है। जिससे ताप वृद्धि का प्रभाव निरस्त हो जाता है। अर्थात् नाइट्रिक ऑक्साइड अधिक बनती है।
(ii) दाब का प्रभाव – NO के निर्माण में आयतन में कोई परिवर्तन नहीं होता है। अतः ला शातेलिए नियम के अनुसार दाब के परिवर्तन से साम्य प्रभावित नहीं होता है।
(iii) सांद्रता का प्रभाव – ला शातेलिए नियम के अनुसार साम्यावस्था पर N2 या O2 के मिलाने पर साम्य अग्र दिशा में विस्थापित हो जाता है। जिससे साम्य के उस दिशा में जाने पर सांद्रता वृद्धि अप्रभावित रहती है और NO का निर्माण अधिक होता है।

Note – ला शातेलिए नियम के रसायनिक अनुप्रयोग के ओर भी उदाहरण है। जैसे अमोनिया NH3 का बनना, सल्फर ट्राइऑक्साइड SO3 का उत्पाद तथा फास्फोरस पेंटाक्लोराइड PCl5 का वियोजन आदि। आप इसमें से किसी एक पर ताप, दाब और सांद्रण के प्रभाव को व्यक्त कर सकते हैं।


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