द्रव स्नेही तथा द्रव विरोधी कोलाइड क्या है, सोल किसे कहते हैं, उदाहरण द्रवरागी, द्रवविरागी

कोलाइडी विलयन क्या है इसके बारे में हम पिछले लेख में अध्ययन कर चुके हैं उसमें हमने कोलाइडी के प्रकार के बारे में भी अध्ययन किया है। लेकिन इस अध्याय के अंतर्गत हम द्रव स्नेही और द्रव विरोधी कोलाइड के बारे में पूर्ण ज्ञान प्राप्त करेंगे।

द्रव स्नेही और द्रव विरोधी कोलाइड का NCERT book में नाम द्रवरागी और द्रवविरागी कोलाइड है इसलिए आप कंफ्यूज न होना, दोनों एक ही हैं। इस लेख के अंतर्गत किसी भी नाम का प्रयोग किया जा सकता है।

परिक्षिप्त व्यवस्था और परिक्षेपण माध्यम के आधार पर कोलाइड को दो प्रकार से वर्गीकरण किया गया है।
(1) द्रव स्नेही कोलाइड (द्रवरागी कोलाइड)
(2) द्रव विरोधी कोलाइड (द्रवविरागी कोलाइड)

1. द्रव स्नेही कोलाइड (द्रवरागी कोलाइड)

वे पदार्थ जो द्रव अर्थात परिक्षेपण माध्यम के संपर्क में आने पर आसानी से कोलाइडी विलयन बना लेते हैं। उन्हें द्रव स्नेही अथवा द्रवरागी कोलाइड (lyophilic colloids in Hindi) कहते हैं।

द्रवरागी कोलाइड विलयन प्रायः स्थायी होते हैं चूंकि इनमें परिक्षेपण माध्यम तथा परिक्षिप्त प्रावस्था के बीच आकर्षण बल आरोपित होता है।
उदाहरण – गोंद, स्टार्च, प्रोटीन आदि द्रव स्नेही कोलाइड के उदाहरण हैं।

द्रव स्नेही कोलाइड उत्क्रमणीय प्रकृति के होते हैं। यह विद्युत अपघट्य के विलयनों में शीघ्र ही अवक्षेपित नहीं होते हैं। अगर यह विक्षेपित हो जाते हैं तो इन्हें पुनः किसी उचित विद्युत अपघट्य के विलयन द्वारा आसानी से कोलाइडी विलयन बना लेते हैं जिस कारण इन्हें उत्क्रमणीय कोलाइड भी कहते हैं।

2. द्रव विरोधी कोलाइड (द्रवविरागी कोलाइड)

परिक्षेपण माध्यम के संपर्क में आने पर आसानी से कोलाइडी विलयन नहीं बनाते हैं। उन्हें द्रव विरोधी अथवा द्रवविरागी कोलाइड (lyophobic colloids in Hindi) कहते हैं।

द्रव विरोधी कोलाइड विलयन अस्थायी होते हैं। चूंकि इनमें परिक्षेपण माध्यम तथा परिक्षिप्त प्रावस्था के बीच आकर्षण बल लगभग नगण्य ही होता है।
उदाहरण – सल्फर सोल, सोना सोल, प्लैटिनम सोल तथा फेरिक हाइड्रोक्साइड सोल आदि द्रव विरोधी कोलाइड के उदाहरण हैं।

द्रवविरागी कोलाइड अनुत्क्रमणीय प्रकृति के होते हैं अतः यह विद्युत अपघट्य के विलयनों द्वारा शीघ्रता से अवक्षेपित हो जाते हैं। फलस्वरुप अवक्षेपित होने के बाद इनसे पुनः कोलाइडी विलयन प्राप्त नहीं किया जा सकता है। जिस कारण इन्हें अनुत्क्रमणीय कोलाइड भी कहते हैं।

द्रव स्नेही तथा द्रव विरोधी कोलाइड में अंतर

  1. द्रव स्नेही कोलाइड स्थायी होते हैं जबकि द्रव विरोधी कोलाइड अस्थायी होते हैं।
  2. द्रव स्नेही कोलाइड उत्क्रमणीय प्रकृति के होते हैं जबकि द्रव विरोधी कोलाइड अनुत्क्रमणीय प्रकृति के होते हैं।
  3. द्रव स्नेही कोलाइड जल में शीघ्र ही अवक्षेपित नहीं होते हैं। जबकि द्रव विरोधी कोलाइड जल में शीघ्रता से अवक्षेपित हो जाते हैं।
  4. द्रव स्नेही कोलाइड के कणों पर आवेश की मात्रा बहुत कम या शून्य होती है। जबकि द्रव विरोधी कोलाइड के कणों पर एक निश्चित धनात्मक या ऋणात्मक आवेश होता है।
  5. गोंद, स्टार्च, प्रोटीन आदि द्रव स्नेही कोलाइड के उदाहरण हैं। जबकि सल्फर सोल, सोना सोल आदि द्रव विरोधी कोलाइड के उदाहरण है।

सोल

वह कोलाइडी विलयन जिसमें परिक्षिप्त प्रावस्था ठोस तथा परिक्षेपण माध्यम द्रव होता है। तो उस कोलाइडी विलयन को सोल (sol in Hindi) कहते हैं।
सोल के उदाहरण – स्टार्च, सल्फर सोल, फेरिक हाइड्रोक्साइड सोल आदि।


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