ओस्टवाल्ड का तनुता नियम क्या है, सीमाएं, सूत्र तथा अनुप्रयोग का वर्णन कीजिए Chemistry

ओस्टवाल्ड का तनुता नियम

किसी दुर्बल विद्युत अपघट्य के विलयन में अवियोजित अणुओं और आयनों के मध्य साम्यावस्था रहती है। ओस्टवाल्ड ने प्रयोगों द्वारा दुर्बल विद्युत अपघट्यों के विलयनों के लिए द्रव्य अनुपाती क्रिया का नियम प्रयुक्त करके एक नियम प्रस्तावित किया। जिसे ओस्टवाल्ड का तनुता नियम (ostwald dilution law in Hindi) कहते हैं।
इस नियम के अनुसार, किसी दुर्बल विद्युत अपघट्य के आयनिक साम्य पर द्रव्य अनुपाती क्रिया का नियम लगाया जा सकता है।

ओस्टवाल्ड के तनुता सूत्र की स्थापना

माना एक दुर्बल विद्युत अपघट्य AB का एक ग्राम अणु V लीटर विलयन में उपस्थित है। एवं साम्यवस्था पर वियोजन की मात्रा α है तो विद्युत अपघट्य AB के अवियोजित अणुओं और मुक्त आयनों A+ तथा B के मध्य साम्यावस्था को निम्न प्रकार व्यक्त किया जा सकता है।

ओस्टवाल्ड का तनुता नियम

इन अवयवों के सक्रिय द्रव्यमान को निम्न प्रकार लिखा जा सकता है।
[AB] = \large \frac{1 - α}{V} , [A+] = \large \frac{α}{V} , [B] = \large \frac{α}{V} ,
द्रव्य अनुपाती क्रिया के नियम के अनुसार
AB का आयनन (या वियोजन) स्थिरांक
K = \frac{[A^+][B^-]}{[AB]}
पदार्थ की साम्य सांद्रताओं के मान रखने पर आयनन की मात्रा
K = \frac{α/V × α/V}{(1-α)/V}
K = \frac{α^2}{V(1-α)}
\footnotesize \boxed { K = \frac{α^2}{V(1-α)} }

पढ़ें… वियोजन की मात्रा की परिभाषा, आयनन की मात्रा का सूत्र, ताप, दाब व सांद्रण का प्रभाव

यह ओस्टवाल्ड का तनुता सूत्र कहलाता है। जहां α आयनन की मात्रा तथा K दुर्बल विद्युत अपघट्य AB का आयनन स्थिरांक कहते हैं। इस समीकरण द्वारा विभिन्न दुर्बल विद्युत अपघट्य का आयनन स्थिरांक ज्ञात कर सकते हैं।

किसी दुर्बल विद्युत अपघट्य के विलयन का आयनन बहुत कम होता है अतः α का मान 1 की अपेक्षा नगण्य मान सकते हैं। तब
(1 – α) ≈ 1
तो K = \frac{α^2}{V(1-α)}
K = \frac{α^2}{V × 1}
या α2 = KV
या \footnotesize \boxed { α = \sqrt{KV} }
इसे ओस्टवाल्ड का सरल तनुता सूत्र कहते हैं। चूंकि K एक स्थिरांक है तब
\footnotesize \boxed { α ∝ \sqrt{V} }

अतः किसी दुर्बल विद्युत अपघट्य की आयनन (वियोजन) की मात्रा उसकी तनुता के वर्गमूल के अनुक्रमानुपाती होती है।
इस नियम द्वारा स्पष्ट होता है कि किसी दुर्बल विद्युत अपघट्य की वियोजन की मात्रा विलयन की तनुता पर निर्भर करती है। अतः तनुता बढ़ाने पर दुर्बल विद्युत अपघट्य की वियोजन की मात्रा बढ़ती है।

ओस्टवाल्ड का तनुता नियम की सीमाएं

  1. ओस्टवाल्ड का तनुता नियम केवल दुर्बल विद्युत अपघट्य के आयनिक साम्य पर लागू होता है।
  2. प्रबल विद्युत अपघट्य पर यह नियम लागू नहीं होता है। चूंकि प्रबल विद्युत अपघट्य पर द्रव्य अनुपाती क्रिया का नियम लगाने पर यह ज्ञात होता है कि तनुता बढ़ाने पर वियोजन स्थिरांक का मान घटता है। जो कि ओस्टवाल्ड नियम के विरुद्ध है।

ओस्टवाल्ड के नियम के अनुप्रयोग

  1. ओस्टवाल्ड के नियम द्वारा वियोजन स्थिरांक का निर्धारण किया जा सकता है।
  2. ओस्टवाल्ड के नियम द्वारा वियोजन की मात्रा की गणना की जा सकती है।

शेयर करें…

StudyNagar

हेलो छात्रों, मेरा नाम अमन है। Physics, Chemistry और Mathematics मेरे पसंदीदा विषयों में से एक हैं। मुझे पढ़ना और पढ़ाना बहुत ज्यादा अच्छा लगता है। मैंने 2019 में इंटरमीडिएट की परीक्षा को उत्तीर्ण किया। और इसके बाद मैंने इंजीनियरिंग की शिक्षा को उत्तीर्ण किया। इसलिए ही मैं studynagar.com वेबसाइट के माध्यम से आप सभी छात्रों तक अपने विचारों को आसान भाषा में सरलता से उपलब्ध कराने के लिए तैयार हूं। धन्यवाद

View all posts by StudyNagar →

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *