राउल्ट का नियम क्या है गणितीय व्यंजक ज्ञात कीजिए, के अनुप्रयोग, सीमाएं, सूत्र

राउल्ट का नियम

सन 1887 ई० में वैज्ञानिक राउल्ट ने अवाष्पशील पदार्थों के द्रव विलायको में विलयन के वाष्प दाब अवनमन पर अनेकों परीक्षण किये एवं इनसे प्राप्त निष्कर्ष के आधार पर राउल्ट ने एक नियम प्रस्तुत किया, जिसे राउल्ट का नियम कहते हैं। इस नियम के अनुसार,
किसी विलायक में कोई अवाष्पशील विलेय मिलाने पर विलायक का वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन विलयन में विलेय के मोल प्रभाज के बराबर होता है। यही राउल्ट का नियम कहलाता है।

माना किसी विलायक का वाष्प दाब Po एवं उसके अणुओं की संख्या N हो, तो इसमें विलेय पदार्थ के n अणु मिलाने पर विलयन का वाष्प दाब Ps है तो
वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन = \frac{P^o - P_s}{P^o}
विलयन में विलेय का मोल प्रभाज = \frac{n}{n + N}
तब राउल्ट के नियमानुसार
\footnotesize \boxed { \frac{P^o - P_s}{P^o} = \frac{n}{n + N} }
इस समीकरण को राउल्ट के नियम का समीकरण या राउल्ट का सूत्र कहते हैं।
यह समीकरण उस विलयन के लिए ही मान्य है जिसमें अवाष्पशील विलेय घुले हों।

1 – \large \frac{P_s}{P^o} = \large \frac{n}{n + N}
1 – \large \frac{P_s}{P^o} = 1 – \large \frac{N}{n + N}
\large \frac{P_s}{P^o} = \large \frac{N}{n + N}
या   Ps = Po (\frac{N}{n + N})

उपरोक्त सूत्र के आधार पर राउल्ट का नियम इस प्रकार भी व्यक्त किया जा सकता है कि
“ विलयन का वाष्प दाब विलयन में विलय के मोल प्रभाज के समानुपाती होता है। ”
अर्थात् \footnotesize \boxed { P_s ∝ \frac{N}{n + N} }
यदि w ग्राम विलेय पदार्थ W ग्राम विलायक में घुले हों तो
n = \large \frac{w}{m} तथा ‌N = \frac{W}{M}
जहां m – विलेय अणुभार तथा M – विलायक का अणुभार है।
तो उपरोक्त समीकरण में n, N के मान रखने पर
\footnotesize \boxed { \frac{P^o - P_s}{P^o} = \frac{w/m}{w/m + W/M} }
यह राउल्ट के नियम का गणितीय व्यंजक है।

तनु विलयन के लिए
\large \frac{P^o - P_s}{P^o} = \large \frac{n}{N}
\footnotesize \boxed { \frac{P^o - P_s}{P^o} = \frac{wM}{mW} }
जहां Po = शुद्ध विलायक का वाष्प दाब
Ps = शुद्ध विलयन का वाष्प दाब
N = विलायक के मोलो की संख्या
n = विलेय मोलो की संख्या
w = विलेय भार
m = विलेय अणुभार
W = विलायक का भार
M = विलायक का अणुभार

Note –
यदि अणुभार तथा भार ज्ञात न हो एवं मोल प्रभाज ज्ञात हो तो राउल्ट का नियम
\footnotesize \boxed { P_s = P^o × χ }
जहां χ – विलायक का मोल प्रभाज है।

राउल्ट के नियम की सीमाएं

  1. राउल्ट का नियम तनु विलयन के लिए मान्य है सांद्र विलयन राउल्ट के नियम से विचलन दर्शाता है।
  2. विद्युत अपघट्य के विलयनों पर राउल्ट का नियम लागू नहीं होता है।
  3. यह नियम केवल अवाष्पशील विलेय के विलयनों पर लागू होता है।
  4. इसमें ताप स्थिर रहना चाहिए।
  5. यह नियम केवल आदर्श विलयनों पर ही लागू होता है अनादर्श विलयन पर नहीं।

शेयर करें…

Leave a Reply

Your email address will not be published.