LCR अनुनादी परिपथ की प्रतिबाधा का सूत्र क्या है | RLC circuit in Hindi

LCR परिपथ

जब किसी परिपथ में प्रेरकत्व L का एक सिरा धारिता C से तथा धारिता से प्रतिरोध R को श्रेणीक्रम में जोड़ देते हैं एवं इनको एक प्रत्यावर्ती धारा स्रोत से जोड़ दिया जाता है। तो इस प्रकार के परिपथ को LCR परिपथ कहते हैं।

एलसीआर परिपथ की प्रतिबाधा

जब प्रेरकत्व, धारिता तथा प्रतिरोध को एक प्रत्यावर्ती धारा स्रोत से जोड़ दिया जाता है। तो इस अवस्था में

  1. प्रतिरोध R के सिरों के बीच विभवांतर VR तथा धारा i के बीच कलांतर शून्य होगा। अतः दोनों समान कला में होंगे
  2. प्रेरकत्व L के सिरों के बीच विभवांतर VL तथा धारा i से कला में 90° आगे होगा। और
  3. धारिता C के सिरों के बीच विभवांतर VC तथा धारा i से कला में 90° पीछे होगा।

तो इस प्रकार VL और VC के बीच कलांतर 180° होगा। अतः यह दोनों एक दूसरे के विपरीत होंगे, एवं इनका कुल विभवांतर (VL – VC) होगा जबकि LCR का परिणामी विभवांतर V है (चित्र में देखें) तो

अनुनादी परिपथ

V2 = VR2 + (VL – VC)2     (पाइथागोरस प्रमेय से)
We know that
V = iR, VL = iXL तथा VC = iXC रखने पर

V2 = i2R2 + (iXL – iXC)2
V2 = i2R2 + i2(XL – XC)2
V2 = i2{R2 + (XL – XC)2}
V2/i2 = R2 + (XL – XC)2
दोनों ओर वर्गमूल करने पर
V/i = \sqrt{R^2 + (X_L - X_C)^2 }

इस समीकरण की ओम के नियम से तुलना करने के बाद ज्ञात होता है कि V/i परिपथ का प्रतिरोध है जिसे परिपथ की प्रतिबाधा कहते हैं इसे Z द्वारा प्रदर्शित किया जाता है तो प्रतिबाधा
\footnotesize \boxed { Z = \sqrt{R^2 + (X_L - X_C)^2 } }
यह एलसीआर परिपथ की प्रतिबाधा का सूत्र है। प्रतिबाधा Z का मात्रक ओम होता है।
चूंकि XL = ωL तथा XC = 1/ωC होता है तब प्रतिबाधा का सूत्र
\footnotesize \boxed { Z = \sqrt{R^2 + (ωL - \frac{1}{ωC})^2 } }
यदि धारा तथा वोल्टेज के बीच कलांतर ϕ है तो
tanϕ = लम्ब/आधार
tanϕ = VL – VC/R
यह भी पढ़ें… प्रत्यावर्ती धारा परिपथ

Imp. Point –

  1. XL > XX तब धारा रहता वोल्टेज के बीच कलांतर धनात्मक होगा।
  2. XL < XX तब धारा रहता वोल्टेज के बीच कलांतर ऋणात्मक होगा।

पढ़ें… 12वीं भौतिकी नोट्स | class 12 physics notes in hindi pdf

अनुनादी परिपथ

जब किसी परिपथ में प्रेरण प्रतिघात तथा धारितीय प्रतिघात बराबर होती है तो परिपथ की प्रतिबाधा उसके प्रतिरोध के बराबर हो जाती है। तब इस परिपथ को अनुनादी परिपथ कहते हैं।

यदि प्रेरण प्रतिघात XL तथा धारितीय प्रतिघात XC बराबर है तो परिपथ की प्रतिबाधा
Z = \sqrt{R^2 + (X_L - X_C)^2 }
चूंकि XL = XC तो
Z = \sqrt{R^2 + (X_L - X_L)^2 }
Z = \sqrt{R^2 + (0)^2 }
\footnotesize \boxed { Z = R}
यही अनुनादी परिपथ की शर्त है।

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