सोडियम कार्बोनेट क्या है, बनाने की विधि, रसायनिक सूत्र, गुण और उपयोग, धावन सोडा

सोडियम कार्बोनेट

सोडियम कार्बोनेट का रासायनिक सूत्र Na2CO3 होता है। सोडियम कार्बोनेट श्वेत क्रिस्टलीय ठोस है। जो डेकाहाइड्रेट (Na2CO3·10H2O) के रूप में पाया जाता है। इसे धावन सोडा भी कहते हैं। सोडियम कार्बोनेट (sodium carbonate in Hindi) जल में घुलनशील है।

सोडियम कार्बोनेट बनाने की विधि

सोडियम कार्बोनेट बनाने की अनेक विधियां हैं लेकिन इनमें सोल्वे विधि मुख्य है।
1. सोल्वे विधि – इस प्रक्रिया में पहले अमोनिया से संतृप्त सोडियम क्लोराइड के सांद्र विलयन (ब्राइन) में कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) गैस प्रवाहित करके अमोनियम बाइकार्बोनेट NH4HCO3 (या अमोनिया हाइड्रोजन कार्बोनेट) बनता है। जो ब्राइन से क्रिया करके सोडियम बाईकार्बोनेट आवश्यक होता है। जिससे गर्म करके सोडियम कार्बोनेट प्राप्त होता है।
NH3 + CO2 + H2O \longrightarrow NH4HCO3
NH4HCO3 + NaCl \longrightarrow NaHCO3 + NH4Cl
2NaHCO3 \xrightarrow {गर्म} Na2CO3 + CO2 + H2O

सोडियम कार्बोनेट के गुण

  • सोडियम कार्बोनेट श्वेत क्रिस्टलीय ठोस होता है जो डेकाहाइड्रेट (Na2CO3·10H2O) के रूप में पाया जाता है। जिसे धावन सोडा कहते हैं।
  • निर्जल सोडियम कार्बोनेट सफेद अक्रिस्टलीय चूर्ण होता है। जिसे सोडा ऐश कहते हैं।
  • सोडियम डेकाहाइड्रेट Na2CO3·10H2O के क्रिस्टल 100°C ताप पर गर्म करने पर मोनोहाइड्रेट Na2CO3·H2O में तथा इसे 100°C से उच्च ताप पर गर्म करने पर यह निर्जल सोडियम कार्बोनेट Na2CO3 में बदल जाता है जिसे सोडा ऐश कहते हैं।
    Na2CO3 · 10H2O \xrightarrow {100°C} Na2CO3 · H2O + 9H2O
    Na2CO3 · H2O \xrightarrow {>100°C} Na2CO3
  • सोडियम कार्बोनेट विलयन को बुझे चूने के साथ गर्म करने पर सोडियम हाइड्रोक्साइड (कास्टिक सोडा) प्राप्त होता है।
    Na2CO3 + Ca(OH)2 \longrightarrow 2NaOH + CaCO3
  • सोडियम कार्बोनेट का कार्बोनेट वाला भाग जल अपघटित होकर क्षारीय विलयन बनाता है।
    CO32- + H2O \longrightarrow HCO3 + OH
  • सोडियम कार्बोनेट के सांद्र विलयन को कार्बन डाइऑक्साइड गैस CO2 द्वारा संतृप्त करने पर सोडियम बाइकार्बोनेट NaHCO3 प्राप्त होता है।
    Na2CO3 + H2O + CO2 \longrightarrow 2NaHCO3

सोडियम कार्बोनेट के उपयोग

  1. सोडियम कार्बोनेट का उपयोग जल को मृदु बनाने में होता है।
  2. प्रयोगशाला में गुणात्मक एवं मात्रात्मक विश्लेषण में अभिकर्मक के रूप में।
  3. कॉस्टिक सोडा एवं बेकिंग सोडा के निर्माण में।
  4. कपड़ों तथा बर्तनों की सफाई करने में।
  5. कागज, कांच एवं बोरेक्स के निर्माण में।
  6. पेंट एवं वस्त्रों के उद्योगों में।

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