हाइड्रोजन क्या है, बनाने की विधि, भौतिक व रासायनिक गुण, उपयोग, प्रकार, समस्थानिक

हाइड्रोजन क्या है

हाइड्रोजन आवर्त सारणी का पहला तत्व है। हाइड्रोजन (hydrogen notes in Hindi) का परमाणु क्रमांक 1 तथा इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 1s1 होता है। हाइड्रोजन की आण्विक रचना सरलतम होती है। तथा इसमें एक नाभिक जिसमें एक प्रोटोन +1 आवेश के साथ होता है। तथा एक इलेक्ट्रॉन कक्ष के चारों ओर परिक्रमा करता है। हाइड्रोजन के परमाणु में केवल 1s उपकोश है। इसलिए इसे आवर्त सारणी के प्रथम आवर्त में रखा गया है।

आवर्त सारणी में हाइड्रोजन का स्थान

हाइड्रोजन आवर्त सारणी का प्रथम तत्व है इसकी परमाणु संख्या 1 तथा इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 1s1 है। हाइड्रोजन के नाभिक में एक प्रोटोन है। जिसके चारों ओर एक इलेक्ट्रॉन घूमता रहता है। हाइड्रोजन वर्ग 1 के क्षार धातुओं से इलेक्ट्रॉनिक विन्यास, संयोजकता, ऑक्सीकरण अवस्था आदि गुणों में समानता प्रदर्शित करता है। अतः हाइड्रोजन को आवर्त सारणी के वर्ग 1 में क्षार धातुओं के ऊपर स्थान दिया गया है। और हाइड्रोजन वर्ग 17 के हैलोजनों से भी समानताएं प्रदर्शित करता है। क्योंकि हाइड्रोजन हैलोजन के समान बाह्य कोश में इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके अक्रिय गैस की स्थायी संरचना प्राप्त कर लेता है। इसलिए इसे वर्ग 17 में भी रख सकते हैं।
अतः हाइड्रोजन का आवर्त सारणी में एक उचित स्थान का न होना आवर्त सारणी का एक दोष है।

हाइड्रोजन बनाने की विधि

हाइड्रोजन बनाने की प्रयोगशाला विधि – प्रयोगशाला में हाइड्रोजन को दानेदार जिंक धातु की तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से अभिक्रिया द्वारा बनाया जाता है।
Zn + 2H+ \longrightarrow Zn2+ + \scriptsize \begin{array}{rcl} H_2 \\ हाइड्रोजन \end{array}

हाइड्रोजन का औद्योगिक निर्माण
1. प्लैटिनम इलेक्ट्रॉड का उपयोग करके अम्लीय जल के विद्युत अपघटन द्वारा हाइड्रोजन का निर्माण किया जाता है।
2H2O \xrightarrow {विद्युत\,अपघटन} 2H2 + O2

2. जिंक धातु को सोडियम हाइड्रोक्साइड NaOH विलयन के साथ गर्म करने पर हाइड्रोजन गैस प्राप्त होती है।
Zn + 2NaOH \longrightarrow Na2ZnO2 + H2

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हाइड्रोजन के भौतिक उपयोग

  • हाइड्रोजन रंगहीन, गंधहीन तथा स्वादहीन गैस है।
  • यह जल में विलय है।
  • गैसों में हाइड्रोजन सबसे हल्की गैस है।
  • हाइड्रोजन का गलनांक -259.2°C तथा क्वथनांक -252.8°C है।

हाइड्रोजन के रासायनिक गुण

1. धातुओं के साथ क्रिया – उच्च ताप पर हाइड्रोजन निम्न धातुओं के साथ क्रिया करने के पश्चात संगत हाइड्राइट देता है।
H2 (g) + 2M (g) \longrightarrow 2MH (g)
जहां M क्षारीय धातु है।

2. धातु ऑक्साइड का अपचयन – गर्म कॉपर ऑक्साइड पर हाइड्रोजन गैस का प्रवाह करने पर कॉपर तथा जल बनता है।
CuO + \scriptsize \begin{array}{rcl} H_2 \\ हाइड्रोजन \end{array} \xrightarrow {अपचयन} \scriptsize \begin{array}{rcl} Cu \\ कॉपर \end{array} + H2O

3. सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में हाइड्रोजन क्लोरीन से अभिक्रिया करके हाइड्रोजन क्लोराइड HCl बनाती है।
H2 + Cl2 \xrightarrow {सूर्य\,का\,प्रकाश} 2HCl

हाइड्रोजन के समस्थानिक

एक ही तत्व के परमाणु, जिनके परमाणु क्रमांक दो समान होते हैं। परंतु उनकी द्रव्यमान संख्याएं भिन्न होती है। समस्थानिक कहलाते हैं। हाइड्रोजन के तीन समस्थानिक हैं।
1. प्रोटियम
2. ड्यूटीरियम
3. ट्राइटियम

इन तीनों की द्रव्यमान संख्याएं क्रमशः 1, 2 और 3 है इनके मुख्य लक्षण निम्न प्रकार से हैं।

समस्थानिकप्रतीकप्रोटोन की संख्यान्यूट्रॉन की संख्याद्रव्यमान संख्यापरमाणु द्रव्यमान
प्रोटियम _1^1H 1011.0078
ड्यूटीरियम _2^1H या D1122.014
ट्राइटियम _3^1H या T1233.016

हाइड्रोजन के उपयोग

  1. हाइड्रोजन का उपयोग अपचायक के रूप में किया जाता है।
  2. वनस्पति तेलों के हाइड्रोजनीकरण द्वारा वनस्पति घी प्राप्त करने में।
  3. इसका उपयोग ईंधन के रूप में भी किया जाता है।
  4. अमोनिया के संश्लेषण में
  5. इसका उपयोग अनेक कार्बनिक रसायन जैसे – मेथेनॉल के उत्पादन में होता है।

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हाइड्रोजन पाठ में जितने भी महत्वपूर्ण टॉपिक्स है उन सभी पर हमने अलग से लेख तैयार किए हैं जिनका लिंक नीचे प्रस्तुत किया गया है।

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